Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana ने अपनी **12वीं** सालगिरह पर एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। अगस्त **2026** तक कुल खातों की संख्या **59.09 करोड़** हो गई है, जिसमें **₹3.17 लाख करोड़** की राशि जमा है, जो ग्रामीण बैंकिंग में बड़े बदलाव को दर्शाता है।
बचत की बदलती तस्वीर
Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana (PMJDY) के आंकड़े बताते हैं कि अब ये खाते सिर्फ औपचारिकता नहीं रह गए हैं। प्रति खाता औसत डिपॉजिट अब ₹5,356 तक पहुंच गया है, जो कि योजना की शुरुआत के मुकाबले 3.4 गुना अधिक है। खास बात यह है कि कुल खातों में से 78% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में हैं, जबकि 56% खाताधारक महिलाएं हैं, जो घरेलू वित्तीय प्रबंधन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
डिजिटल और सोशल सिक्योरिटी का आधार
यह योजना सरकार के Direct Benefit Transfer (DBT) इकोसिस्टम की रीढ़ बन गई है। सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से लीकेज में कमी आई है। इस डिजिटल बदलाव को गति देने के लिए अब तक 41.29 करोड़ RuPay डेबिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, पात्र खाताधारकों को ₹2 लाख तक का एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर भी मिल रहा है, जिसने एक बड़ा सामाजिक सुरक्षा घेरा तैयार किया है।
बैंकों के लिए चुनौतियां और अगला कदम
इतने बड़े स्तर पर बैंकिंग सेवाएं देने के लिए बैंकों, खासकर पब्लिक सेक्टर लेंडर्स, को काफी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट वहन करनी पड़ती है। इस मॉडल की सस्टेनेबिलिटी अब इस पर निर्भर है कि बैंक इन खाताधारकों को MUDRA लोन, Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana और Atal Pension Yojana जैसे अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स कितनी प्रभावी ढंग से क्रॉस-सेल कर पाते हैं। भविष्य में, असली फोकस इन बेसिक खाताधारकों को एक्टिव क्रेडिट और इंश्योरेंस कंज्यूमर में बदलने पर होगा।
