जम्मू-कश्मीर में लगभग **2.40 लाख** ग्रामीण महिलाओं ने 'लखपति दीदी' का दर्जा हासिल कर लिया है, जो कि रूरल माइक्रो-एंटरप्रेन्योरशिप की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल अब छोटे कारोबारियों को बड़े बाजार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
बड़ी उपलब्धि की कहानी
'लखपति दीदी' मुहिम जम्मू-कश्मीर में एक नए आर्थिक अध्याय की तरह है। आधिकारिक डेटा के अनुसार, अब तक 2.40 लाख महिलाएं ऐसी हो गई हैं जिनके घर की सालाना कमाई ₹1 लाख के पार पहुंच गई है। यह उपलब्धि 'दीनदयाल अंत्योदय योजना – नेशनल रूरल लाइवलीहुड्स मिशन' का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में अब तक 3.46 करोड़ से अधिक महिलाएं इस मुकाम को हासिल कर चुकी हैं।
कैसे बढ़ रहा है कारोबार?
इस योजना का मुख्य मकसद ग्रामीण घरों को गुजारे की खेती या छोटे काम से निकालकर औपचारिक बिजनेस मॉडल की ओर ले जाना है। जम्मू-कश्मीर में यह काम 'सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स' (SHGs) के जरिए हो रहा है, जो मुख्य रूप से एनिमल हसबेंडरी, डेयरी फार्मिंग और पारंपरिक 'टिल्ला एम्ब्रोइडरी' (Tilla embroidery) जैसे क्राफ्ट पर जोर दे रहे हैं। सरकार इन समूहों को ट्रेनिंग, सपोर्ट और आसान क्रेडिट मुहैया करा रही है।
अगला पड़ाव: बिजनेस इनक्यूबेशन
उद्यमिता को और अधिक औपचारिक रूप देने के लिए सरकार ने 21 अगस्त, 2026 को 'नेशनल कैंपेन ऑन एंटरप्रेन्योरशिप II' की शुरुआत की है। इसमें अब डिजिटल एडॉप्शन और बेहतर मार्केट लिंकेज पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए IIM जम्मू जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की योजना है, जो इन सूक्ष्म व्यवसायों को बिजनेस की बारीकियां सिखाएंगे।
भविष्य की चुनौतियां
हालांकि, सरकारी मदद से मिली यह सफलता सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। इन छोटे उद्यमों को लंबी रेस का घोड़ा बनाने के लिए मार्केट एक्सेस, लगातार डिमांड और बिना सरकारी मदद के अपने पैरों पर खड़े होने की चुनौती का सामना करना होगा। देखने वाली बात यह होगी कि ये पारंपरिक क्राफ्ट्स वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को कितनी मजबूती से झेल पाते हैं।
