न्यूयॉर्क में चल रही 81वीं UN जनरल असेंबली (UNGA) में विदेश मंत्री S. Jaishankar भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य एजेंडा UN सिक्योरिटी काउंसिल में रिफॉर्म्स को तेज करना और India-EFTA जैसे ट्रेड एग्रीमेंट्स के जरिए आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देना है।
आर्थिक कूटनीति और India-EFTA का महत्व
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस के साथ चर्चा में India-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट को लागू करने पर बात हुई। इस डील में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं, जो भारत के लिए व्यापारिक मार्गों में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि इसका सीधा असर फार्मास्यूटिकल्स, एग्रीकल्चर और टेक्नोलॉजी जैसे ग्रोथ सेक्टर पर पड़ेगा। भारत का 'चाइना प्लस वन' (China Plus One) स्ट्रैटेजी के तहत इन एग्रीमेंट्स का मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और किसी एक देश पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, ट्रेड बैरियर कम होने से घरेलू कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ सकता है।
ग्लोबल गवर्नेंस और कूटनीतिक मुलाकातें
UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार की अपनी पुरानी मांग को दोहराते हुए जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट के साथ वैश्विक स्थिरता और फूड सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा, इक्वाडोर के प्रतिनिधियों के साथ फार्मा एक्सपोर्ट और एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर हुई बैठकें यह बताती हैं कि भारत अब पारंपरिक बाजारों से आगे निकलकर नए क्षेत्रों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है।
अब सबकी नजर 26 सितंबर को होने वाली जनरल डिबेट पर है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि इन ट्रेड डील्स को जमीन पर कैसे उतारा जाता है और इसका भारतीय निर्यात कंपनियों के मुनाफे पर क्या असर पड़ता है।
