विदेश मंत्री S. Jaishankar ने यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इससे दुनिया भर में फूड और एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों और फर्टिलाइजर सप्लाई पर पड़ सकता है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर मंडराते संकट के बादल
न्यूयॉर्क में एक इवेंट के दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ग्लोबल इकोनॉमी 'गैदरिंग स्टॉर्म' (बढ़ते तूफान) जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। यूक्रेन और मिडिल ईस्ट का तनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक अस्थिरता का बड़ा कारण बनता जा रहा है, जो 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए चिंताजनक है।
भारत के एनर्जी और ट्रेड पर असर
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल बाहर से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार की हलचल का सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल और ट्रेड डेफिसिट पर पड़ता है। जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग मार्जिन तक दिखाई देता है, जिससे मार्केट में महंगाई का दबाव बढ़ता है।
फर्टिलाइजर और खेती पर जोखिम
ऊर्जा के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए भी खतरा कम नहीं है। रूस और वेस्ट एशिया में फर्टिलाइजर उत्पादन में बाधा आने से पूरी दुनिया की फूड सिक्योरिटी पर असर पड़ रहा है। भारत पोटाश और फॉस्फेट जैसे फर्टिलाइजर का बड़ा आयातक है। सप्लाई चेन टूटने से एग्रो-केमिकल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और अंततः इसका असर आम आदमी की थाली (फूड इन्फ्लेशन) पर पड़ना तय है, जिस पर Reserve Bank of India की पैनी नजर रहती है।
निवेशकों के लिए जरूरी संकेत
ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित एसेट्स की तरफ पैसा भागने से भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी प्रभावित हो सकता है। आने वाले समय में निवेशकों को क्रूड ऑयल की कीमतों और घरेलू रिटेल इन्फ्लेशन डेटा पर नजर रखनी चाहिए। सरकार कैसे दालों, खाने के तेल और उर्वरकों की सप्लाई सुरक्षित करती है, यह देखना मार्केट के लिए बेहद अहम होगा।
