अटलांटा में आयोजित G20 बैठक में विदेश मंत्री S Jaishankar ने ग्लोबल सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करने पर जोर दिया है। उनका साफ कहना है कि किसी एक मार्केट पर निर्भरता कम होनी चाहिए, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
अटलांटा में संपन्न हुए G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए S Jaishankar ने कहा कि वर्तमान ग्लोबल ट्रेड मॉडल काफी जोखिम भरा है, क्योंकि उत्पादन कुछ ही जगहों पर केंद्रित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के खतरों जैसे कि पेंडेमिक या जियो-पॉलिटिकल तनाव से बचने के लिए सप्लाई चेन का अधिक पारदर्शी और वितरित होना जरूरी है।\n\n### भारतीय कंपनियों के लिए मौके\n\nविदेश मंत्री का यह बयान भारत की 'मेक इन इंडिया' रणनीति को मजबूती देता है। भारत सरकार लगातार उन ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित कर रही है जो चीन जैसे सिंगल-सोर्स हब से शिफ्ट होना चाहती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और फार्मा सेक्टर की कंपनियों के लिए यह नीति एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकती है, क्योंकि ग्लोबल कंपनियां अब अधिक सुरक्षित और पारदर्शी सप्लाई चेन की तलाश में हैं।\n\n### समुद्री मार्गों का रिस्क और लॉजिस्टिक्स\n\nइस बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने Strait of Hormuz और Bab al-Mandeb Strait जैसे महत्वपूर्ण मार्गों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यदि इन रास्तों पर कोई भी तनाव पैदा होता है, तो लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ सकती है। इससे उन भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है जो कच्चे माल और एनर्जी के लिए इंपोर्ट पर निर्भर हैं।\n\n### निवेशकों के लिए टेक-अवे\n\nहालांकि यह चर्चा एक सकारात्मक लॉन्ग-टर्म फ्रेमवर्क तैयार करती है, लेकिन मार्केट पर इसका असर ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज और ट्रेड पॉलिसी में बदलावों पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग एक्सपेंशन की रफ्तार और कमोडिटी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
