इजरायल में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर मची खींचतान के बीच निवेशकों की नजर देश की आर्थिक सेहत पर है, जहां **70%** का Debt-to-GDP रेशियो और भारी-भरकम डिफेंस स्पेंडिंग बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।
इजरायल के 120 सीटों वाले 'नेसेट' (Knesset) के लिए चुनाव होने जा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह एक अहम मोड़ है क्योंकि चुनाव के नतीजे ही यह तय करेंगे कि नई सरकार देश के नेशनल सिक्योरिटी और लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच संतुलन कैसे बनाएगी।
बाजार की चाल और चिंताएं
पिछले कुछ समय में Tel Aviv Stock Exchange ने शानदार प्रदर्शन किया है और 2023 के अंत से अब तक यह लगभग 130% तक उछला है। इस तेजी के पीछे वहां का मजबूत टेक्नोलॉजी सेक्टर और डिफेंस-साइबर सिक्योरिटी एक्सपोर्ट की ग्लोबल डिमांड रही है। हालांकि, ग्राउंड लेवल पर चुनौतियां कम नहीं हैं:
- डिफेंस खर्च: GDP का लगभग 8% हिस्सा सिर्फ डिफेंस पर खर्च हो रहा है, जिससे बजट घाटा (Budget Deficit) 4.5% के स्तर पर पहुंच गया है।
- बढ़ता कर्ज: पब्लिक डेट यानी सरकारी कर्ज अब GDP के 70% के करीब पहुंच रहा है, जो आने वाली सरकार के लिए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की बड़ी परीक्षा होगी।
गठबंधन की पहेली
इजरायल की चुनावी व्यवस्था में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी के लिए सरकार बनाना आसान नहीं होता। यहाँ अक्सर छोटी या कट्टरपंथी पार्टियों के साथ गठबंधन करना पड़ता है, जो बातचीत के दौरान अपनी शर्तें मनवाने का काफी दबदबा रखती हैं। यह 'फ्रैगमेंटेड' लेजिस्लेटिव ढांचा आगे चलकर पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार जुडिशियल रिफॉर्म्स, डिफेंस बजट और कर्ज के प्रबंधन को लेकर क्या रुख अपनाती है।
