Strait of Hormuz को फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया है। प्रतिबंधों और परमाणु नीति पर बनी यह गतिरोध वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जिससे एनर्जी मार्केट में हलचल तेज हो गई है।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कतरी मध्यस्थों के जरिए 'Strait of Hormuz' को फिर से खोलने का एक प्रस्ताव रखा था। इसमें 7 दिनों के लिए जलमार्ग को सुरक्षित रखने और क्षेत्रीय सैन्य अभियानों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ईरान बिना पुख्ता परमाणु गारंटी के सिर्फ प्रतिबंधों में ढील चाहता है।
भारत पर क्या होगा असर?
दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी आर्टरीज में से एक होने के कारण, यहाँ कोई भी तनाव ग्लोबल ऑयल प्राइस को तुरंत प्रभावित करता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ऐसी घटनाएं इंडियन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL के लिए सीधा रिस्क हैं। कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव इनके इम्पोर्ट कॉस्ट और नेट प्रॉफिट मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
सुरक्षा मोर्चे पर बढ़ती मुश्किलें
डिप्लोमैटिक गतिरोध के अलावा, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और भी जटिल होती जा रही है। लाल सागर (Red Sea) के शिपिंग रूट्स में हूती विद्रोहियों (Houthi forces) के बढ़ते हमलों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि सऊदी अरब के कई पब्लिक संस्थानों ने रिमोट ऑपरेशन्स शुरू कर दिए हैं। यह स्पष्ट है कि संघर्ष अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सक्रिय परिचालन खतरा बन चुका है।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी यह है कि वे वॉशिंगटन और तेहरान के रुख पर नजर रखें। तेल की कीमतों में स्थिरता और टैंकर रूट्स की सुरक्षा ही आने वाले दिनों में एनर्जी शेयरों और मार्केट सेंटीमेंट की दिशा तय करेगी।
