नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट से पहले ईरान, भारत के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य केंद्र चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) का विकास होगा, जो लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम है।
चाबहार पोर्ट: रणनीतिक मोर्चे पर बड़ी तैयारी
आगामी 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान भारत और ईरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने की योजना बना रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच हालिया मुलाकातों के बाद, अब दोनों देश डिप्लोमैटिक बातचीत को फंक्शनल इकोनॉमिक रिजल्ट्स में बदलने पर जोर दे रहे हैं।
दोनों देशों के बीच इस सहयोग का सबसे बड़ा आधार Chabahar Port है। भारत के लिए यह पोर्ट सेंट्रल एशियन मार्केट्स तक पहुंचने का एक सुरक्षित कॉरिडोर है, वहीं तेहरान के लिए यह लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊर्जा और ट्रांजिट सेक्टर में व्यापार को बढ़ाने के लिए दोनों सरकारें सक्रिय रूप से नए विकल्पों पर विचार कर रही हैं।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
निवेशकों के लिए इस बढ़ते सहयोग के बीच कुछ तकनीकी और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां भी मौजूद हैं। ईरान पर लगे इंटरनेशनल सैंक्शंस (Sanctions) के कारण बैंकिंग और फाइनेंस के मोर्चे पर कई दिक्कतें बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर इंडियन कंपनियों की निवेश प्रक्रिया पर पड़ता है।
इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी तनाव और 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शिपिंग कॉस्ट को प्रभावित कर सकती हैं। भविष्य में होने वाले समझौतों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश ग्लोबल रेगुलेटरी दबाव को कैसे संभालते हैं और व्यापारिक गलियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। बाजार की नजरें अब समिट के दौरान होने वाले औपचारिक समझौतों पर टिकी हैं।
