Share Market: स्माल और मिड-कैप शेयरों से किनारा कर रहे निवेशक, लार्ज-कैप की ओर बढ़ा रुझान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Share Market: स्माल और मिड-कैप शेयरों से किनारा कर रहे निवेशक, लार्ज-कैप की ओर बढ़ा रुझान

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की रणनीति बदल गई है। पिछले **8** हफ्तों से जारी गिरावट और **7 अक्टूबर, 2026** को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी पॉलिसी बैठक से पहले अनिश्चितता के कारण, अब निवेशक स्मॉल और मिड-कैप शेयरों को छोड़कर लार्ज-कैप कंपनियों में सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का नजरिया अब काफी सतर्क हो गया है। पिछले 25 सालों में यह पहला मौका है जब बेंचमार्क इंडेक्स लगातार 8 हफ्ते से गिरावट का सामना कर रहे हैं। इस लंबे दौर के बाद, अब निवेशक उन हाई-ग्रोथ और हाई-रिस्क शेयरों से दूरी बना रहे हैं जिन्होंने पिछले कुछ समय में रैली को लीड किया था।

क्यों हो रहा है लार्ज-कैप की ओर बदलाव?

इस बदलाव की मुख्य वजह घरेलू और ग्लोबल अनिश्चितता है। उम्मीद जताई जा रही है कि RBI आज रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे कर्ज महंगा हो जाएगा। ब्याज दरें बढ़ने का सबसे बुरा असर छोटी कंपनियों पर पड़ता है, क्योंकि उनका कर्ज चुकाने का खर्च बढ़ जाता है और मार्जिन पर दबाव आता है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से लगातार बिकवाली ने मार्केट की लिक्विडिटी कम कर दी है, जिससे स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

स्मॉल और मिड-कैप में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

पिछले दो सालों में कई निवेशकों ने ग्रोथ की उम्मीद में स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में बड़ा निवेश किया था। हालांकि, अब डेटा बता रहा है कि कंपनियों की कमाई और उनके वैल्यूएशन के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है। कई छोटी कंपनियां लार्ज-कैप के मुकाबले महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, जबकि उनकी अर्निंग्स कंसिस्टेंसी काफी कम है। बाजार में सुधार (correction) के दौरान इन महंगे शेयरों में गिरावट सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

आगे क्या देखना होगा?

अब सबकी नजरें Q2 FY27 के नतीजों पर टिकी हैं। निवेश के लिहाज से क्वालिटी और मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में टिक पाएंगी। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे उन कंपनियों पर नजर रखें जो बढ़ती लागत के बावजूद अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने में कामयाब हो रही हैं। अब बाजार में 'क्वालिटी' का दौर है, न कि अंधाधुंध ग्रोथ का।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.