India Food Waste Crisis: हर साल बर्बाद हो रहे **₹1.5 लाख करोड़**, क्या नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा गेम चेंजर?

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Food Waste Crisis: हर साल बर्बाद हो रहे **₹1.5 लाख करोड़**, क्या नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा गेम चेंजर?

भारत में केवल **17%** कृषि उत्पाद ही प्रोसेस हो पाते हैं, जिससे सालाना **₹1.5 लाख करोड़** का नुकसान हो रहा है। **2026** के कमजोर मानसून और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच, **311** पेंडिंग कोल्ड चेन प्रोजेक्ट्स पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।

भारी पैदावार, लेकिन बड़ा नुकसान

2025-26 में रिकॉर्ड तोड़ फसल के बावजूद, देश में फूडग्रेन का उत्पादन 376.56 मिलियन टन और हॉर्टिकल्चर का उत्पादन 377.8 मिलियन टन रहा है। इतनी बड़ी मात्रा के बावजूद, सही स्टोरेज न होने से ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का सालाना नुकसान हो रहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार है।

क्यों फेल हो रहे हैं मेगा फूड पार्क्स?

वर्तमान में सारा जोर सेंट्रलाइज्ड मेगा फूड पार्क्स पर है, लेकिन इनकी दूरी किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, PMFME स्कीम के तहत बनी माइक्रो-यूनिट्स के पास वर्किंग कैपिटल और कनेक्टिविटी की भारी कमी है। नतीजतन, बड़े पार्क्स पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहे और छोटे यूनिट्स स्केल नहीं कर पा रहे हैं।

मानसून की मार और नई उम्मीदें

2026 का मानसून 12.6% कम रहा, जिससे 313 जिलों में फसलों की पैदावार अनिश्चित हो गई है। ऐसे में हार्वेस्टिंग के तुरंत बाद प्रोसेसिंग और स्टोरेज एक विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है।

निवेशकों के लिए क्या है मौका?

प्राइवेट सेक्टर के लिए अब प्रोडक्शन बेल्ट के पास 'शेयर्ड टेस्टिंग' और 'पैकेजिंग' जैसी सुविधाएं देने का बड़ा मौका है। अभी 311 कोल्ड चेन प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं, जिनका पूरा होना सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी बदल सकता है। लॉजिस्टिक्स और फूड टेक कंपनियों में आने वाले बदलावों पर नजर रखना ही निवेशकों के लिए मुनाफे का रास्ता खोल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.