भारत में 2026 मानसून सीजन **12.6%** की भारी कमी के साथ खत्म हुआ, जो पिछले एक दशक का सबसे खराब आंकड़ा है। इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जहां सितंबर महीने में Mahindra & Mahindra और Escorts Kubota की ट्रैक्टर बिक्री में दो अंकों की गिरावट देखी गई है।
मानसून की इस बेरुखी ने देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। महाराष्ट्र में 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जो जल संकट की गंभीरता को दर्शाता है। नतीजतन, सरकार ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन कर दिया है, क्योंकि गिरता भूजल स्तर फसलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीण मांग पर दबाव
ग्रामीण इलाकों में खर्च करने की क्षमता कम हो गई है। सितंबर की बिक्री के आंकड़े इस सुस्ती के बड़े संकेत हैं। Mahindra & Mahindra की ट्रैक्टर बिक्री में 21% और Escorts Kubota की बिक्री में 16.7% की गिरावट दर्ज की गई है। किसान फिलहाल नए निवेश को टाल रहे हैं, जिससे रबी सीजन की तैयारी के लिए कैश फ्लो की चिंता बढ़ गई है।
फाइनेंशियल सेक्टर के लिए जोखिम
इस गिरावट का असर फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर तक पहुंच रहा है। ग्रामीण इलाकों में लोन देने वाले बैंक और NBFCs अब एसेट क्वालिटी को लेकर सतर्क हो गए हैं। कृषि लागत बढ़ने और पैदावार कम होने की आशंका से लोन चुकाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, El Niño के बने रहने और कम बारिश के चलते हाइड्रोपावर जनरेशन पर भी असर पड़ा है, जिससे पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है। निवेशक अब ग्रामीण बिक्री और फूड इन्फ्लेशन डेटा पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
