India’s Weekend Spending Surge: वीकेंड पर शॉपिंग का क्रेज! रिटेल सेक्टर में बड़ा बदलाव

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AuthorMehul Desai|Published at:
India’s Weekend Spending Surge: वीकेंड पर शॉपिंग का क्रेज! रिटेल सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारतीय उपभोक्ता अपनी साप्ताहिक खरीदारी का **61.5%** हिस्सा वीकेंड पर ही खर्च कर रहे हैं। फैशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में आए इस उछाल ने रिटेल कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है, हालांकि महंगाई का डर अभी भी बना हुआ है।

भारत में रिटेल का मिजाज पूरी तरह बदल रहा है। अब लोग रोजमर्रा की खरीदारी के बजाय वीकेंड की 48 घंटे की विंडो पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय शहरों में वीकेंड पर औसत खर्च ₹10,732 तक पहुंच गया है, जबकि वीकडेज (कामकाजी दिनों) में यह मात्र ₹6,724 रहता है। इस 'वीकेंड इकोनॉमी' ने देश में डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग (गैर-जरूरी खर्च) को नई रफ्तार दी है।

डिस्क्रेशनरी खर्च में जोरदार उछाल

रिटेलर्स देख रहे हैं कि वीकेंड पर लोग दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं। फैशन और अपैरल की बिक्री इन दो दिनों में दोगुनी से ज्यादा हो जाती है। वहीं, एंटरटेनमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में वीकडेज के मुकाबले क्रमशः 2.02 गुना और 1.99 गुना की तेजी देखी गई है। यहां तक कि ग्रॉसरी शॉपिंग भी अब वीकेंड पर ही सिमट रही है, जिसकी वॉल्यूम में 1.64 गुना का इजाफा हुआ है, जो दिखाता है कि परिवार अब एक साथ पूरे हफ्ते का सामान खरीदना पसंद कर रहे हैं।

यह ट्रेंड अब केवल मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। जयपुर, सूरत और पुणे जैसे टियर-2 शहरों में भी वीकेंड और वीकडेज के खर्च का अंतर बड़े महानगरों को टक्कर दे रहा है। 'रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI)' के अनुसार, इन बदलावों की बदौलत जुलाई 2026 में रिटेल सेक्टर ने 8% की सालाना ग्रोथ दर्ज की है।

ऑपरेशन्स के लिए बढ़ी चुनौती

जब हफ्ते की 60% से ज्यादा कमाई केवल दो दिनों में आती है, तो रिटेलर्स के लिए सप्लाई चेन मैनेज करना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। कंपनियों को इन्वेंट्री का ऐसा संतुलन बनाना पड़ रहा है कि वीकेंड पर स्टॉक खत्म न हो जाए और वीकडेज में बेकार माल जमा न हो। यह 'लम्पी' (अनियमित) डिमांड बेहतर लॉजिस्टिक्स की मांग करती है, क्योंकि थोड़ी सी भी चूक सीधे सेल्स और मुनाफे पर चोट करती है।

महंगाई का खतरा

वीकेंड स्पेंडिंग की यह चमक भले ही शहरी खपत में लचीलापन दिखा रही हो, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। जुलाई 2026 में रिटेल महंगाई 4.45% पर रही, जबकि फूड इन्फ्लेशन 5.52% के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। हाई-इनकम ग्रुप वाले लोग तो अपनी जीवनशैली के अनुसार खर्च कर रहे हैं, लेकिन लो-इनकम सेगमेंट अभी भी फूक-फूक कर कदम रख रहा है।

अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या फेस्टिव सीजन के दौरान यह मांग बनी रहेगी, या फिर भारी स्टॉक के दबाव में कंपनियों को मार्जिन बचाने के लिए डिस्काउंट का सहारा लेना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.