अगस्त 2026 में घर पर बनी शाकाहारी थाली की औसत कीमत बढ़कर **₹29.5** पर पहुंच गई है, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे ज्यादा है। प्याज की कीमतों में **43%** की उछाल और कुकिंग ऑयल व LPG के बढ़ते दामों ने आम आदमी के बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।
भारत में घर पर खाना पकाना महंगा होता जा रहा है। सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण अगस्त 2026 में शाकाहारी थाली की लागत ₹29.5 के स्तर को छू गई है।
प्याज की कीमतों का संकट
महंगाई की मुख्य वजह प्याज है, जिसके दाम साल-दर-साल आधार पर 43% बढ़कर ₹40 प्रति किलोग्राम हो गए हैं। महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने और रबी सीजन के उत्पादन में 5-6% की गिरावट ने आपूर्ति को प्रभावित किया है। राहत देने के लिए सरकार अब 19 शहरों में ₹35 प्रति किलो के भाव पर सब्सिडाइज्ड प्याज बेच रही है।
रसोई के अन्य खर्चों का बोझ
केवल सब्जी ही नहीं, बल्कि रसोई का पूरा बजट गड़बड़ा गया है। एडिबल ऑयल की कीमतों में 11% और LPG सिलेंडर के दाम में 10% की वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी कीमतों में आई अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रसोई पर पड़ रहा है।
क्या है राहत की खबर?
हालांकि, आलू की कीमतों में 12% और टमाटर की कीमतों में 28% की गिरावट ने थाली को और महंगा होने से काफी हद तक बचाया है। वहीं, नॉन-वेजिटेरियन थाली की कीमत ₹57.5 रही, जिसमें 5% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। ब्रायलर चिकन के भाव 10% महंगे हुए, लेकिन श्रावण महीने के कारण मांग में आई कमी ने कीमतों को थोड़ा थामे रखा।
निवेशकों के लिए संकेत
मार्केट वॉचर्स के लिए यह फूड इन्फ्लेशन एक महत्वपूर्ण संकेत है। जब खाने-पीने की चीजों पर खर्च बढ़ता है, तो डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग (ऐश-ओ-आराम की चीजों पर खर्च) में कमी आती है। त्योहारी सीजन के दौरान यह महंगाई कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के लिए एक चुनौती बन सकती है, जिसे निवेशकों को करीब से मॉनिटर करना होगा।
