31 अगस्त 2026 तक भारत की 'ट्रिलियन-रुपया' मार्केट कैप वाली कंपनियों का आंकड़ा बढ़कर 119 हो गया है, जो मार्च के मुकाबले **27%** की बड़ी उछाल है। इस तेजी की कमान मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने संभाली है।
भारत के एक्सक्लूसिव ₹1 ट्रिलियन मार्केट कैपिटलाइजेशन क्लब का विस्तार तेजी से हो रहा है। मार्च 2026 में इस लिस्ट में 94 कंपनियां थीं, जो अगस्त के अंत तक बढ़कर 119 हो गई हैं। बाजार में यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि निफ्टी 50 और सेंसेक्स के मुकाबले मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है।
मिड-कैप और फाइनेंशियल सेक्टर का जलवा
निवेशकों का पैसा अब फार्मा, पावर और फाइनेंशियल सेक्टर की हाई-ग्रोथ मिड-साइज कंपनियों की ओर शिफ्ट हो रहा है। Laurus Labs ने तो कमाल ही कर दिया, जिसका मार्केट कैप मात्र 5 महीने में लगभग दोगुना होकर ₹1.03 ट्रिलियन पर पहुंच गया। वहीं, Adani Enterprises ने 74% की जोरदार बढ़त के साथ ₹3.95 ट्रिलियन का आंकड़ा छुआ। इसके अलावा Zydus Life Sciences, Cipla, BHEL और Hitachi Energy India ने भी इस एलीट क्लब में अपनी जगह पक्की की है। फाइनेंशियल स्पेस में Aditya Birla Capital और HDFC AMC ने भी शानदार माइलस्टोन हासिल किए हैं।
PSU और बड़े शेयरों में दबाव
मिड-कैप की इस चमक के बीच कुछ दिग्गज कंपनियों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण रहा है। ONGC, Coal India और NTPC जैसे बड़े सरकारी उपक्रमों (PSU) को 10% से 19% तक की गिरावट का सामना करना पड़ा। इसकी मुख्य वजह खराब Q1 नतीजे रहे। साथ ही, Reliance Industries, HDFC Bank और Hindustan Unilever जैसे ब्लू-चिप शेयरों में भी वैल्युएशन मॉडरेशन दिखा है, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) डिफेंसिव शेयरों से अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इतनी तेजी के बाद अब कुछ वैल्युएशंस अपने ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। यदि इन मिड-कैप कंपनियों के मुनाफे में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं दिखी, तो करेक्शन का रिस्क बना हुआ है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या PSU कंपनियां अपनी अर्निंग्स में सुधार कर पाएंगी और क्या ब्लू-चिप शेयरों में गिरावट के बाद दोबारा खरीदारी का मौका बनेगा।
