BRICS के साथ भारत का Trade Deficit: $226 बिलियन के पार, अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं खतरे?

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
BRICS के साथ भारत का Trade Deficit: $226 बिलियन के पार, अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं खतरे?

FY26 में BRICS देशों के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर **$226.1 बिलियन** हो गया है। निर्यात के मुकाबले आयात में भारी उछाल के कारण यह अंतर बढ़ा है, जिसका सीधा असर अब रुपये की चाल पर पड़ सकता है।

भारत और BRICS देशों के बीच व्यापार का अंतर लगातार चौड़ा होता जा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में यह ट्रेड डेफिसिट $226.1 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इन देशों के साथ कुल ट्रेड वॉल्यूम भले ही $417.5 बिलियन तक पहुंच गया हो, लेकिन इसमें एक्सपोर्ट की तुलना में इंपोर्ट का हिस्सा बहुत ज्यादा है, जो भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का एक बड़ा हिस्सा बन गया है।

आयात पर बढ़ती निर्भरता

इस गैप की बड़ी वजह तीन देशों पर हमारी अत्यधिक निर्भरता है। BRICS से होने वाले भारत के कुल आयात का 84% हिस्सा केवल चीन, रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आता है। अकेले चीन की बात करें तो भारत का द्विपक्षीय व्यापार घाटा $112.2 बिलियन रहा है। वहीं, रूस से कच्चे तेल और एनर्जी कमोडिटी की भारी खरीद के कारण वहां से भी आयात काफी बढ़ गया है। यह निर्भरता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन और कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है।

इकोनॉमी पर क्या पड़ेगा असर?

इतने बड़े स्तर का ट्रेड डेफिसिट सीधे तौर पर भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है। अगर आयात का भुगतान करने के लिए विदेशी मुद्रा की भारी निकासी जारी रही, तो रुपये में कमजोरी आ सकती है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करती हैं और इंपोर्ट पर निर्भर हैं। यदि ये कंपनियां अपनी लागत बढ़ने पर उसे ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पहुंचना तय है।

एक्सपोर्ट बढ़ाने की चुनौती

हालांकि भारत ने इन देशों को $95.7 बिलियन का एक्सपोर्ट किया है, लेकिन यह रफ्तार इंपोर्ट की तुलना में बेहद धीमी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए नॉन-टैरिफ बैरियर्स को हटाना और मार्केट एक्सेस में सुधार करना जरूरी है। भारत को अब अपनी एक्सपोर्ट रणनीति को कमोडिटीज से हटाकर हाई-वैल्यू गुड्स की तरफ शिफ्ट करना होगा। आने वाले समय में निवेशकों की नजर सरकार के उन पॉलिसी अपडेट्स पर होगी, जिनसे एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.