India's Trade Deficit: BRICS+ देशों के साथ बढ़ा व्यापार घाटा, कुल ट्रेड डेफिसिट का **68%** हिस्सा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India's Trade Deficit: BRICS+ देशों के साथ बढ़ा व्यापार घाटा, कुल ट्रेड डेफिसिट का **68%** हिस्सा

भारत का BRICS+ देशों के साथ ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) फाइनेंशियल ईयर **2026** में **$226.1 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत के कुल ट्रेड डेफिसिट का **68%** है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

BRICS+ देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध एक नए और जटिल मोड़ पर हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में ट्रेड डेफिसिट का $226.1 बिलियन तक पहुंचना नीति निर्धारकों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि यह ब्लॉक भारत की मैन्युफैक्चरिंग के लिए कच्चा माल, ऊर्जा और महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का बड़ा स्रोत है, लेकिन यह व्यापारिक संतुलन के मामले में भारत के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

चीन के साथ व्यापारिक असंतुलन

इस पूरे समीकरण में सबसे बड़ी चुनौती चीन से आ रही है। पिछले 5 सालों में चीन से भारत का आयात 131.8% बढ़ गया है, जबकि उसी दौरान चीन को होने वाले निर्यात में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय कारखाने इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स और प्लास्टिक के लिए चीन पर काफी निर्भर हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए तो जरूरी है, लेकिन व्यापार घाटे को लगातार बढ़ा रहा है।

अन्य देशों की स्थिति

रूस के साथ भी व्यापारिक रुझान कुछ ऐसा ही है, जहां ऊर्जा और मटेरियल की जरूरतों के कारण आयात का पलड़ा भारी है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस मामले में एक सकारात्मक अपवाद है। UAE इस ब्लॉक के भीतर भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, जहां व्यापार का प्रवाह $37.4 बिलियन तक पहुंच गया है।

निवेशकों के लिए संकेत

इकोनॉमी और निवेशकों के लिए यह स्थिति फॉरेक्स मैनेजमेंट (Forex Management) और लॉन्ग-टर्म मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पिटिटिवनेस के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत अब तेजी से निर्यात के लिए नए और संतुलित बाजारों की तलाश में है ताकि अपनी निर्भरता को कम किया जा सके और ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.