भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट अगस्त 2026 में घटकर **$26.86 बिलियन** पर आ गया है। इसकी मुख्य वजह एक्सपोर्ट में **26.12%** का उछाल और गोल्ड इम्पोर्ट में आई भारी गिरावट रही है।
निर्यात में शानदार प्रदर्शन
अगस्त में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट $43.81 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 26.12% अधिक है। इस मजबूती के पीछे अमेरिका, यूरोपीय संघ और BRICS देशों से भारतीय सामानों की लगातार मांग रही है। इंजीनियरिंग गुड्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, केमिकल्स और टेक्सटाइल्स जैसे सेक्टर इस वृद्धि के मुख्य इंजन बनकर उभरे हैं।
इम्पोर्ट का गणित और गोल्ड की भूमिका
वहीं दूसरी ओर, देश का कुल इम्पोर्ट बिल बढ़कर $70.76 बिलियन पहुंच गया, जो अगस्त 2025 के मुकाबले 14.1% ज्यादा है। राहत की बात यह रही कि गोल्ड इम्पोर्ट में 57.7% की बड़ी गिरावट आई और यह घटकर $2.3 बिलियन रह गया, जबकि पिछले साल यह $5.4 बिलियन था। इस कमी ने ट्रेड गैप को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोक लिया।
निवेशकों के लिए जोखिम (Key Risks)
भले ही आंकड़े बेहतर दिख रहे हों, लेकिन ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज और जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता अभी भी चिंता का विषय है। कच्चा तेल (Crude Oil) और कोयले का इम्पोर्ट अभी भी भारत के लिए एक बड़ा खर्च बना हुआ है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या आने वाले महीनों में इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर में यह एक्सपोर्ट ग्रोथ बरकरार रह पाती है या ग्लोबल सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट से यह रफ्तार धीमी पड़ती है।
