भारत की टैक्स प्रणाली में एनुइटी (Annuity) से मिलने वाली आय को सामान्य आमदनी माना जाता है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड (Infrastructure Bonds) पर टैक्स छूट मिलती है। यह अंतर रिटायरमेंट प्लानिंग को प्रभावित करता है।
इंफ्रा बॉन्ड और एनुइटी के बीच टैक्स का फासला
भारत की टैक्स व्यवस्था में एक बड़ी विसंगति है जो लंबी अवधि की रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर डालती है। एक तरफ, सरकार देश भर में चल रही विकास परियोजनाओं जैसे हाईवे और रेलवे के लिए पैसा जुटाने के वास्ते इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में दोबारा निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट देती है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 85 के तहत, निवेशक इन सरकारी बॉन्ड में पैसे लगाकर टैक्स बचा सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, जीवन भर पेंशन देने वाले एनुइटी प्रोडक्ट्स से होने वाली आय पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आपकी रेगुलर इनकम पर टैक्स लग जाएगा, जिससे आपकी कुल कमाई कम हो सकती है। यह अंतर निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय है।
एनुइटी और टैक्स
जब आप लाइफटाइम एनुइटी खरीदते हैं, तो आप एकमुश्त रकम के बदले जीवन भर नियमित आय की गारंटी लेते हैं। लेकिन यह इनकम आपकी आमदनी की तरह ही मानी जाती है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।
हालांकि, GST काउंसिल ने सितंबर 2025 से एनुइटी और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% GST को माफ कर दिया है, जो पॉलिसीधारकों के लिए राहत की बात है। लेकिन, इनकम टैक्स का मूल मुद्दा अभी भी बना हुआ है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनुइटी सुरक्षा का एक ऐसा जरिया है जो म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) जैसे दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स नहीं दे सकते। एनुइटी में, आपकी बचत खत्म होने या बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कंपनी उठाती है, लेकिन टैक्स की वजह से यह आकर्षक नहीं लग रहा।
आगे क्या?
टैक्स एक्सपर्ट्स और पॉलिसी एनालिस्ट इस पर लगातार चर्चा कर रहे हैं कि एनुइटी पर लगने वाले टैक्स को कम किया जाए। एक सुझाव यह है कि एनुइटी से होने वाली सालाना आमदनी का कुछ हिस्सा टैक्स-फ्री किया जाए या फिर एनुइटी प्रोडक्ट्स पर कम फ्लैट टैक्स लगाया जाए। ऐसा होने से लोग इन सुरक्षित और लंबी अवधि के प्रोडक्ट्स में ज्यादा निवेश करेंगे।
फिलहाल, निवेशकों को अपनी कैश फ्लो प्लानिंग करते समय एनुइटी पर लगने वाले टैक्स को ध्यान में रखना होगा। भविष्य में टैक्स नियमों में बदलाव या बजट घोषणाओं पर नजर रखनी होगी, खासकर IRDAI और PFRDA जैसे रेगुलेटरी बॉडीज द्वारा लाए जाने वाले नए और फ्लेक्सिबल एनुइटी प्रोडक्ट्स पर।
