भारत का इलिसिट (Illicit) ट्रेड मार्केट बढ़कर **₹7.98 लाख करोड़** पर पहुंच गया है। ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के जरिए हो रहे इस अवैध कारोबार से FMCG और टोबैको सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
भारत में स्मगलिंग और नकली सामानों का कारोबार अब डिजिटल हो चुका है। साल 2022-23 तक यह शैडो इकोनॉमी ₹7.98 लाख करोड़ के आंकड़े को छू चुकी है। अब अपराधी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग का इस्तेमाल कर ग्राहकों तक सीधे नकली सामान पहुँचा रहे हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investment Risk)
निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि FMCG, टोबैको, शराब और एग्रोकेमिकल जैसी सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। टोबैको सेक्टर की हालत तो और भी खराब है, जहाँ साल 2025 तक कुल खपत का 26.1% हिस्सा अवैध सिगरेट का है। जब बाजार में बड़ी हिस्सेदारी नकली या बिना टैक्स वाले सामानों की होती है, तो बड़ी कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ थमने का डर बना रहता है।
सरकारी खजाने को सेंध
अवैध कारोबार का असर सरकारी रेवेन्यू पर भी दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में टैक्स अधिकारियों ने ₹2.23 लाख करोड़ की GST चोरी पकड़ी है। इसमें से ₹58,772 करोड़ सिर्फ इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) फ्रॉड के हैं। साल 2020 से 2025 के बीच कुल ₹7.08 लाख करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई है, जबकि रिकवरी महज ₹1.29 लाख करोड़ रही है।
आने वाले समय में उन कंपनियों पर नजर रखें जो डिजिटल सुरक्षा और सप्लाई चेन ऑडिट में बेहतर निवेश कर रही हैं, क्योंकि अवैध नेटवर्क का मुकाबला करने के लिए अब तकनीक ही सबसे बड़ा हथियार है।
