SHG Movement: ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव, 10 करोड़ परिवार अब बनेंगे 'बिजनेस हाउस'

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SHG Movement: ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव, 10 करोड़ परिवार अब बनेंगे 'बिजनेस हाउस'

भारत का स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन अब क्रेडिट से आगे बढ़कर बिजनेस की ओर कदम बढ़ा रहा है। करीब **10 करोड़** ग्रामीण परिवार अब औपचारिक रूप से रजिस्टर्ड बिजनेस में तब्दील हो रहे हैं, जिससे रूरल मार्केट और माइक्रो-फाइनेंसिंग का परिदृश्य बदलने वाला है।

भारत में स्वयं सहायता समूहों (SHG) का ढांचा एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। अब तक ये समूह 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (DAY-NRLM) के तहत सिर्फ कर्ज लेने तक सीमित थे। लेकिन अब सरकार इन 94 लाख समूहों, जो करीब 10 करोड़ ग्रामीण परिवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, को औपचारिक व्यावसायिक उद्यमों (Commercial Enterprises) में बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

राज्यों की बड़ी पहल

ओडिशा का 'मिशन शक्ति' और गोवा जैसी राज्य सरकारें इन समूहों को बड़े स्तर पर एक साथ लाकर उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही हैं। गोवा सरकार ने इन महिला-नेतृत्व वाली इकाइयों को सरकारी कैंटीन जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जोड़कर उन्हें सीधे बाजार उपलब्ध कराने की रणनीति अपनाई है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

MSME का दर्जा और फायदे

इस बदलाव की धुरी 'उद्यम रजिस्ट्रेशन' (Udyam Registration) है। MSME के रूप में रजिस्टर्ड होकर, ये समूह औपचारिक बैंकिंग, ब्रांडिंग सपोर्ट और एक्सपोर्ट चैनलों का लाभ उठा सकेंगे। इस प्रक्रिया में वर्ल्ड बैंक समर्थित 'RAMP' (Raising and Accelerating MSME Performance) प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इकोनॉमी और इन्वेस्टर्स के लिए मौके

जब SHG, MSME के रूप में रजिस्टर्ड होंगे, तो उनका एक पुख्ता फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए उनकी क्रेडिट-वर्थनेस आंकना आसान हो जाएगा, जिससे माइक्रो-लेंडिंग में जोखिम कम होगा। जैसे-जैसे ये समूह डिजिटल बुककीपिंग अपनाएंगे, वे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क का भी बड़ा हिस्सा बन जाएंगे, जो रूरल मार्केट में निवेश करने वाले संस्थानों के लिए एक नया रास्ता खोलेगा।

रिस्क फैक्टर और चुनौतियां

हालांकि, यह राह चुनौतियों से खाली नहीं है। इन समूहों को पेशेवर बुककीपिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन जैसी बारीकियों को समझना होगा। बिना सरकारी मदद के ओपन मार्केट में टिके रहने के लिए उन्हें टेक्निकल स्किल विकसित करनी होगी। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने SHG सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय खुद को एक प्रॉफिटेबल बिजनेस के रूप में स्थापित कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.