India GDP: सुस्त हो सकती है भारत की विकास दर, Q1 में 7.4% के अनुमान से निवेशकों की नजर

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India GDP: सुस्त हो सकती है भारत की विकास दर, Q1 में 7.4% के अनुमान से निवेशकों की नजर

अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ धीमी होकर **7.4%** रह सकती है, जो पिछले चार क्वार्टर का निचला स्तर है। इस गिरावट के पीछे थोक महंगाई में इजाफा और वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें मुख्य वजह मानी जा रही हैं।

ग्रोथ में क्यों आ रही है नरमी?

देश की इकोनॉमिक ग्रोथ में हल्की सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं। फिस्कल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी मजबूत है, लेकिन पिछले चार तिमाहियों के प्रदर्शन को देखें तो यह एक डाउनफॉल है।

महंगाई का बड़ा असर

इस आंकड़ों के पीछे एक तकनीकी कारण थोक महंगाई में हुई भारी बढ़ोतरी है। जून 2026 में थोक महंगाई दर 9.87% और जुलाई 2026 में 9.78% रही थी। अर्थशास्त्र में जब थोक कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो 'जीडीपी डिफ्लेटर' का असर अंतिम 'रियल' ग्रोथ फिगर पर पड़ता है, जिससे उत्पादन स्थिर रहने के बावजूद ग्रोथ कम दिखाई देती है।

सेक्टर का हाल

इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है, लेकिन एग्रीकल्चर सेक्टर के सामने मानसून की अनिश्चितता के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। वहीं, वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष ने मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) बढ़ा दी है, जिसका असर मुनाफे पर भी पड़ रहा है।

RBI की क्या है तैयारी?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पहले ही सतर्क है। उन्होंने शेष तीन तिमाहियों के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से 6.8% के बीच रखा है। अब बाजार की नजर 31 अगस्त को आने वाले आधिकारिक डेटा पर है, जिससे यह साफ होगा कि क्या आरबीआई अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में कोई बदलाव करेगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.