भारत की सरकारी खरीद (Procurement) में AI का राज: ग्लोबल फंड और डिजिटल क्रांति

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत की सरकारी खरीद (Procurement) में AI का राज: ग्लोबल फंड और डिजिटल क्रांति
Overview

वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए सरकारी खरीद (Procurement) को लेकर सरकार ने लिक्विडिटी (Liquidity) का भरोसा दिलाया है। पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) अब पूरी तरह से डिजिटाइज्ड हो गया है, जिससे ट्रांजैक्शन (Transaction) तेज और ट्रैक किए जा सकेंगे। वहीं, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) प्लेटफॉर्म को AI और मशीन लर्निंग (Machine Learning) से जोड़ा जा रहा है, जिसका मकसद एफिशिएंसी (Efficiency), ट्रांसपेरेंसी (Transparency) और फ्रॉड (Fraud) को रोकना है। इसके साथ ही, वर्ल्ड बैंक (World Bank) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) जैसे बड़े ग्लोबल फंड्स भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और ग्रीन इनिशिएटिव्स (Green Initiatives) के लिए भारी निवेश कर रहे हैं।

भारत की खरीद (Procurement) में बड़ा बदलाव: डिजिटल का संगम ग्लोबल निवेश से

सरकारी लिक्विडिटी (Liquidity) का पक्का इंतजाम, तेज होंगे भुगतान

एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी (Expenditure Secretary) वी. वी. वुआलनम (V. Vualnam) ने साफ कर दिया है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए सरकारी खरीद (Procurement) के वास्ते पर्याप्त लिक्विडिटी (Liquidity) की व्यवस्था है। इससे बिडर्स (Bidders) को भुगतान की टाइमलाइन (Timeline) को लेकर अब चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) अब काफी हद तक ऑनलाइन हो चुका है, जिससे सारे ट्रांजैक्शन (Transactions) तेज, पारदर्शी और ऑडिट किए जाने योग्य होंगे। सरकारी खरीद (Procurement) में इस तरह की प्रेडिक्टिबिलिटी (Predictability) और डॉक्यूमेंटेशन (Documentation) को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वेंडर्स (Vendors) और इवैल्यूएटर्स (Evaluators) दोनों के लिए प्रक्रिया सरल हो सके।

AI-पावर्ड खरीद (Procurement) की ओर बढ़ता कदम

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) को शामिल करने की घोषणा भारत की पब्लिक प्रोक्योरमेंट (Public Procurement) को मॉडर्नाइज (Modernize) करने की दिशा में एक अहम कदम है। GeM, जिसने 2016 में लॉन्च होने के बाद से ट्रांसपेरेंसी (Transparency), एफिशिएंसी (Efficiency) और इंक्लूसिविटी (Inclusivity) बढ़ाकर इस सेक्टर में क्रांति ला दी है, अब AI का इस्तेमाल फ्रॉड डिटेक्शन (Fraud Detection), एनोमली आइडेंटिफिकेशन (Anomaly Identification), खरीद योजना (Procurement Planning) और यूजर्स के लिए इंटेलिजेंट वर्चुअल असिस्टेंस (Intelligent Virtual Assistance) जैसे कामों के लिए करेगा। यह कदम भारतीय कंपनियों में AI को अपनाने के बड़े ट्रेंड के साथ जुड़ता है, जहाँ जनरेटिव AI (Generative AI) और अन्य एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज (Advanced Technologies) में बड़ा निवेश किया जा रहा है। AI, खरीद (Procurement) प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को काफी कम कर सकता है और लागत भी घटा सकता है, जिससे एफिशिएंसी (Efficiency) में ठोस सुधार की उम्मीद है। PFMS, भारत के डिजिटल फाइनेंस मैनेजमेंट (Digital Finance Management) की रीढ़, 300 से ज़्यादा बैंकों के साथ इंटीग्रेट (Integrate) हो रहा है, जो रियल-टाइम फंड ट्रैकिंग (Real-time Fund Tracking) और सीधे बेनिफिशियरी को पेमेंट (Beneficiary Payment) की सुविधा देता है। यह 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) इनिशिएटिव (Initiative) का एक अहम हिस्सा है।

ग्लोबल कैपिटल (Global Capital) से भारत के डेवलपमेंट को मिलेगा बूस्ट

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (International Financial Institutions) भारत के डेवलपमेंट एजेंडा (Development Agenda) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड बैंक (World Bank) अगले 5 साल तक हर साल $10 बिलियन (लगभग ₹83,000 करोड़) भारत के लिए मोबिलाइज (Mobilize) करने की योजना बना रहा है। यह फाइनेंसिंग (Financing) सस्टेनेबिलिटी (Sustainability), इंक्लूजन (Inclusion), ग्रीन एनर्जी (Green Energy) और लोकल डेवलपमेंट (Local Development) जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़ी होगी। इसी तरह, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने 2023 में $2.6 बिलियन (लगभग ₹21,500 करोड़) का सॉवरेन लेंडिंग (Sovereign Lending) प्रदान किया, जिसका फोकस स्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन (Structural Transformation), जॉब क्रिएशन (Job Creation), इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure), ग्रीन ग्रोथ (Green Growth) और अर्बनाइजेशन (Urbanization) पर रहा। यह बड़ा कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflow) भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाता है, जो देश की इकोनॉमिक कॉम्पिटिटिवनेस (Economic Competitiveness) को बढ़ाएगा और $5 ट्रिलियन की इकोनॉमी (Economy) बनने के लक्ष्य में मदद करेगा। वर्ल्ड बैंक (World Bank) भारत को लो- और मिडिल- इनकम देशों में प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (Private Infrastructure Investment) के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन (Destination) मानता है, जो कैपिटल डिप्लॉयमेंट (Capital Deployment) के लिए एक मजबूत माहौल को दर्शाता है।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) की राह में चुनौतियां

पब्लिक प्रोक्योरमेंट (Public Procurement) में डिजिटलाइजेशन (Digitalization) और AI इंटीग्रेशन (AI Integration) की यह आक्रामक पहल पारंपरिक खरीद (Procurement) के तरीके को बदल रही है। यह जहां एफिशिएंसी (Efficiency) और ट्रांसपेरेंसी (Transparency) को बढ़ावा देती है, वहीं मौजूदा बिजनेसेज (Businesses) के लिए एक बड़े बदलाव की जरूरत है और इसके लिए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर (Data Infrastructure) और स्किल्ड ह्यूमन कैपिटल (Skilled Human Capital) की भी आवश्यकता होगी। भारतीय IT सेक्टर (IT Sector) में भी क्लाउड (Cloud), AI (AI) और साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity) सॉल्यूशंस (Solutions) की बढ़ती मांग के कारण मजबूत ग्रोथ देखी जा रही है, और IT स्पेंडिंग (IT Spending) में भी बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान है। हालांकि, एडवांस्ड AI (Advanced AI) को इंटीग्रेट (Integrate) करने की जटिलता, डेटा प्राइवेसी (Data Privacy) सुनिश्चित करना और ऐतिहासिक रूप से धीमी खरीद (Procurement) साइकिल (Cycle) को सुव्यवस्थित करना जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां अभी बाकी हैं। भारत में सरकारी खरीद (Government Procurement), जो GDP का 20-22% है, एक डिजिटल-फर्स्ट (Digital-first), डेटा-ड्रिवेन (Data-driven) भविष्य की ओर एक ज़रूरी लेकिन जटिल विकास से गुजर रही है। इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रांजिशन (Transition) को कितनी अच्छी तरह मैनेज किया जाता है, व्यापक लाभ सुनिश्चित किए जाते हैं, और टेक्नोलॉजी (Technology) में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ कैसे तालमेल बिठाया जाता है।

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