Deep Tech Mission: सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर की ओर बढ़ रहा भारत, टैलेंट पाइपलाइन में बड़ा बदलाव जरूरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Deep Tech Mission: सॉफ्टवेयर से हार्डवेयर की ओर बढ़ रहा भारत, टैलेंट पाइपलाइन में बड़ा बदलाव जरूरी

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सॉफ्टवेयर सर्विसेज से हटाकर सेमीकंडक्टर और रोबोटिक्स जैसे डीप टेक (Deep Tech) सेक्टर में ले जाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस सफर में सबसे बड़ी चुनौती केवल मैनेजर्स नहीं, बल्कि स्किल्ड टेक्निकल वर्कफोर्स को तैयार करना है।

भारत इस समय एक बड़े आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश का लक्ष्य अब केवल सॉफ्टवेयर सर्विसेज का लीडर बने रहना नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर और रोबोटिक्स जैसे हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पहचान बनाना है। अब तक भारतीय बाजार में कॉर्पोरेट मैनेजमेंट और सॉफ्टवेयर एडमिनिस्ट्रेशन का दबदबा रहा है, लेकिन डीप टेक यानी इंजीनियरिंग पर आधारित तकनीक के लिए पूरी तरह से अलग स्किल्स की जरूरत है। चिप फैब्रिकेशन और प्रिसिजन मैकेनिक्स जैसे इंडस्ट्रीज तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक हमारे पास ऐसे स्किल्ड टेक्नीशियन न हों जो वैक्यूम सिस्टम और सूक्ष्म मशीनों को संभाल सकें।

पुरानी शिक्षा व्यवस्था बनाम नई जरूरत

सबसे बड़ी बाधा हमारी शिक्षा प्रणाली में है, जो दशकों से केवल थ्योरी और स्टैंडर्ड नियमों पर टिकी रही है। भारत में हमेशा से ही 'मैनेजमेंट' और 'एडमिनिस्ट्रेशन' को ज्यादा तवज्जो मिली है। लेकिन अब सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर के लिए ऐसे लोगों की जरूरत है जो वास्तव में मशीनों पर काम कर सकें। क्लीनरूम ऑपरेटर्स और हार्डवेयर डिजाइन इंजीनियर्स को अब सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट्स के बराबर सम्मान और पहचान देने की जरूरत है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI का तालमेल

भारत केवल हार्डवेयर पर ही नहीं, बल्कि 'India Stack' और भाषाई AI प्लेटफॉर्म जैसे 'Bhashini' के एकीकरण पर भी काम कर रहा है। इसका मकसद ग्रामीण भारत तक लैंड रिकॉर्ड, लोन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं आवाज के जरिए पहुँचाना है। इन AI सॉल्यूशंस को अब कागजी एल्गोरिदम के बजाय कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को हल करने पर ध्यान देना होगा।

रिस्क और चुनौतियां

अगर हमारा एजुकेशन सिस्टम और वोकेशनल ट्रेनिंग पाइपलाइन, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हो रहे कैपिटल खर्च की रफ्तार से नहीं बढ़ी, तो देश के लिए बड़ा रिस्क पैदा हो सकता है। यदि हमें विदेशी टैलेंट पर निर्भर रहना पड़ा, तो हमारे लोकल प्रोडक्ट्स की कॉम्पिटिटिवनेस कम हो जाएगी। साथ ही, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के लक्ष्यों को लागू करना भी एक चुनौतीपूर्ण काम है, क्योंकि हमें अपनी पुरानी अकादमिक सोच को बदलना होगा।

निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर अब स्पेशलाइज्ड वोकेशनल ट्रेनिंग और यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री पार्टनरशिप पर टिकी है। फैब्रिकेशन लैब्स और GPU क्लस्टर्स की उपलब्धता ही यह तय करेगी कि भारत ग्लोबल टेक्नोलॉजी की दौड़ में कितनी मजबूती से खड़ा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.