भारत ने 2047 तक 'विकसित अर्थव्यवस्था' बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए आर्थिक उदारीकरण और ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप्स को और गहरा करने की जरूरत पर एक्सपर्ट्स ने जोर दिया है। पर-कैपिटा GDP में बड़ा उछाल लाना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
भारत का 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने का सपना एक बड़ा और साहसी विजन है, जिसके लिए पूरे आर्थिक ढांचे में बड़े बदलाव की जरूरत है। फिलहाल, देश का पर-कैपिटा GDP करीब $3,000 के आसपास है, जिसे $30,000 तक पहुंचाने के लिए अगले दो दशकों तक लगातार तेज ग्रोथ बनाए रखनी होगी। जानकारों का मानना है कि 1991 के आर्थिक सुधारों की तरह ही, अब फिर से एक बड़े आर्थिक उदारीकरण (Liberalization) की दरकार है।
ग्लोबल अलायंस का बढ़ता महत्व
भारत की आर्थिक रणनीति में अब ग्लोबल साझेदारी सबसे अहम है। उदाहरण के तौर पर, भारत और UK के बीच के रिश्ते अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर्स पर शिफ्ट हो रहे हैं।
India-UK Free Trade Agreement की अहमियत
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) इस पूरी योजना की धुरी है। अगर यह डील सफल होती है, तो ट्रेड बैरियर्स कम होंगे और द्विपक्षीय व्यापार का वॉल्यूम $100 बिलियन के पार जाने का लक्ष्य है। निवेशकों के लिए ऐसी ट्रेड डील्स बाजार में पहुंच और ग्लोबल इंटीग्रेशन का सबसे बड़ा इंडिकेटर हैं।
इनोवेशन और एजुकेशन का संगम
सिर्फ कैपिटल इन्वेस्टमेंट ही काफी नहीं है, बल्कि देश के ह्यूमन कैपिटल को तैयार करना भी जरूरी है। इसके लिए University of Birmingham और IIT Madras जैसे संस्थानों के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोग्राम्स और कोलेबोरेशन एक नई राह खोल रहे हैं। सस्टेनेबल एनर्जी और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी एक मजबूत वर्कफोर्स तैयार करने में मदद करेगी।
आने वाले समय में निवेशकों के लिए सरकारी नीतियों में तेजी, बड़े ट्रेड एग्रीमेंट्स का भविष्य और एजुकेशन सेक्टर में हो रहे इनोवेशन पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
