फरवरी का PMI (Purchasing Managers' Index) डेटा भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहा है। जहां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने ज़ोरदार वापसी की है, वहीं सर्विसेज सेक्टर में थोड़ी नरमी देखी गई है। इसके साथ ही, लागत दबाव (Cost Pressure) बढ़ने के संकेत भी मिले हैं, जो आने वाले समय के लिए अहम हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रिकॉर्ड उछाल
इस बार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ का मुख्य इंजन साबित हुआ। फरवरी में इसका PMI बढ़कर 56.9 पर पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मजबूत डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) और नवंबर के बाद से अब तक के सबसे मजबूत नए ऑर्डर्स (New Orders) की बदौलत यह तेजी आई। आउटपुट (Output) में भी खास उछाल देखा गया, और इंटरनेशनल सेल्स (International Sales) में भी इजाफा हुआ, जिसने नवंबर के बाद से ओवरऑल प्राइवेट सेक्टर की सबसे मजबूत ग्रोथ में योगदान दिया।
सर्विसेज सेक्टर में नरमी, कॉम्पिटिशन बढ़ा
इसके विपरीत, सर्विसेज सेक्टर में थोड़ी सुस्ती रही। फरवरी में इसका PMI जनवरी के 58.5 से घटकर 58.1 पर आ गया, जो दो महीने का सबसे निचला स्तर है। सर्विसेज में नए बिज़नेस ग्रोथ (New Business Growth) 13 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इसका मुख्य कारण सर्विसेज प्रोवाइडर्स के बीच बढ़ता कॉम्पिटिशन और डोमेस्टिक डिमांड में थोड़ी नरमी है। हालांकि, इंटरनेशनल सेल्स में सर्विसेज सेक्टर ने अच्छी ग्रोथ दिखाई, जो अगस्त के बाद सबसे तेज थी।
लागत दबाव बनी सबसे बड़ी चिंता
सबसे बड़ी चिंता लागत बढ़ने की है। पूरे प्राइवेट सेक्टर में इनपुट कॉस्ट (Input Cost) पिछले 15 महीनों में सबसे तेज गति से बढ़ी है। खास तौर पर सर्विसेज फर्मों को इनपुट प्राइस इन्फ्लेशन (Input Price Inflation) का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ रहा है, जो ढाई साल में सबसे ज्यादा है। यह बढ़ती लागत RBI (Reserve Bank of India) के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि यह उपभोक्ता कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
इकोनॉमी की मजबूती बरकरार
इन मासिक उतार-चढ़ावों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती दिखा रही है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत 2026 तक 6.7% से 7.8% की दर से बढ़ने वाला दुनिया का सबसे तेज ग्रोथ वाला बड़ा देश बना रहेगा। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 6.9% और डेलॉइट (Deloitte) ने 7.5% से 7.8% ग्रोथ का अनुमान लगाया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 2026 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
क्या हैं चिंता के कारण?
हालांकि, कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज के बीच बढ़ता अंतर चिंताजनक है। सर्विसेज सेक्टर में लागत का दबाव बढ़ने से उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं। जनवरी में रिटेल इन्फ्लेशन (Retail Inflation) बढ़कर 2.75% हो गया, जो दिसंबर के 1.33% से काफी ज्यादा है। सर्विसेज सेक्टर का GVA (Gross Value Added) में 56.4% का योगदान देखते हुए, इस सेक्टर की महंगाई पर नजर रखना अहम है। इसके अलावा, जनवरी में अनइंप्लॉयमेंट (Unemployment) बढ़कर 5.0% होना और ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) का बढ़ना भी कुछ और संभावित दिक्कतें हैं।
आगे क्या?
आगे चलकर, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स खपत और निवेश दोनों से ग्रोथ जारी रहने की बात कह रहे हैं। लेकिन इस ग्रोथ की निरंतरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बढ़ती महंगाई, खासकर सर्विसेज सेक्टर में, पर कैसे काबू पाया जाता है। RBI अपनी नीतियों में ग्रोथ और कीमत स्थिरता (Price Stability) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। अनुमान है कि महंगाई पहली दो तिमाहियों में 4.0% से 4.2% तक जा सकती है।