India Economic Confidence: भारत में छाई उम्मीद की लहर, दुनिया में दूसरे नंबर पर!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
India Economic Confidence: भारत में छाई उम्मीद की लहर, दुनिया में दूसरे नंबर पर!
Overview

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा एक बार फिर आसमान पर पहुंच गया है. देश का ऑप्टिमिज्म (optimism) बढ़कर **69%** हो गया है, जो महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. स्थिर गवर्नेंस (Governance) और लगातार लागू हो रही नीतियों के दम पर भारत दुनिया भर में ऑप्टिमिज्म के मामले में दूसरे स्थान पर आ गया है.

उम्मीदों को लगे पंख: क्यों बढ़ा भारत का भरोसा?

भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर जनता का भरोसा 7 पर्सेंटेज पॉइंट बढ़कर 69% पर पहुंच गया है. यह Ipsos 'What Worries the World' सर्वे में सामने आया है, जिसने भारत को दुनिया भर में दूसरे नंबर पर ला खड़ा किया है. इस बढ़ते आत्मविश्वास के पीछे मजबूत गवर्नेंस (Governance) और पॉलिसी में निरंतरता (Policy Continuity) जैसे अहम कारक माने जा रहे हैं, जिन्हें अक्सर निवेश और लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके अलावा, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में की गई भारी बढ़ोतरी और सड़क, रेलवे, व रिन्यूएबल एनर्जी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) प्रोजेक्ट्स पर लगातार फोकस भी आर्थिक गति को बल दे रहा है.

वैश्विक मंदी के बीच विकास के मजबूत स्तंभ

मौजूदा सकारात्मक माहौल कई आर्थिक मोर्चों पर दिख रहे सुधारों का नतीजा है. लक्षित आर्थिक विकास पहलों, स्वास्थ्य सेवा में बड़े निवेश और कमजोर वर्गों के लिए की गई व्यवस्थाओं ने लोगों के मूड को बेहतर बनाया है. सतत मोबिलिटी (Sustainable Mobility) और सोलर एनर्जी (Solar Energy) को बढ़ावा देने की रणनीति, साथ ही महंगाई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लक्ष्य बैंड (FY2026 के लिए अनुमानित 4.5%-5.0%) के करीब रखने के उपायों से प्रगति और जीवन की गुणवत्ता दोनों के प्रति प्रतिबद्धता दिखती है. साल 2025 में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के जोरदार इनफ्लो, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में, भारत की लंबी अवधि की विकास गाथा पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है. यह आंतरिक मजबूती दुनिया भर के 41% ऑप्टिमिज्म के मुकाबले भारत को कहीं आगे रखती है, जहां कई देश संघर्षों और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

चिंताएं बरकरार: क्या है आम आदमी की मुख्य फिक्र?

इतने सकारात्मक संकेतों के बावजूद, आम भारतीयों के लिए 'कॉस्ट ऑफ लिविंग' यानी जीवन-यापन की लागत सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. प्रॉपर्टी की कीमतें और कुछ खास खाद्य पदार्थों की महंगाई ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है, भले ही कुल महंगाई दर में नरमी आई हो. शिक्षा को लेकर चिंताएं भी थोड़ी बढ़ी हैं, हालांकि व्यापार समझौतों में संभावित बदलावों से पहुंच और अवसरों में सुधार की उम्मीद है.

भविष्य की राह: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आगे की ओर देखते हुए, विश्लेषकों का भारत की आर्थिक वृद्धि पर सकारात्मक रुख बना हुआ है. वे FY2026 के लिए 6.5% से 7.5% तक की वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं. इस अनुमान के पीछे मजबूत घरेलू खपत, जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Advantages) और जारी पॉलिसी रिफॉर्म्स (Policy Reforms) का बड़ा हाथ है. ये सभी मिलकर भारत के लिए एक लचीले विकास पथ का संकेत देते हैं, भले ही देश को घरेलू दबावों और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटना पड़े.
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