VB-G RAM G योजना में 50% की गिरावट! जुलाई में काम के दिनों में भारी कमी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता

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AuthorMehul Desai|Published at:
VB-G RAM G योजना में 50% की गिरावट! जुलाई में काम के दिनों में भारी कमी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता

भारत की नई ग्रामीण रोजगार योजना, VB-G RAM G (Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission) ने जुलाई 2026 में पिछले साल की तुलना में रोजगार सृजन में लगभग 50% की भारी गिरावट दर्ज की है। MGNREGA की जगह आई इस नई योजना को 13% वर्षा की कमी और केंद्र-राज्यों के बीच लागत-बंटवारे में बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण उपभोग पर असर की चिंता बढ़ गई है।

MGNREGA की जगह VB-G RAM G और काम के दिनों में भारी गिरावट

1 जुलाई 2026 से भारत के ग्रामीण रोजगार परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है, जब नई 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)' योजना लागू की गई। इसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह ली, जो दो दशकों से अधिक समय से ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच रहा है। अपने पहले पूरे महीने के संचालन में, इस नई योजना ने काम के दिनों में भारी गिरावट दिखाई है, जिससे ग्रामीण संकट पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जुलाई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि लगभग 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिनों का रोज़गार पैदा हुआ, जो जुलाई 2025 में दर्ज 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिनों का लगभग आधा है। सरकार ने इस गिरावट का कारण खरीफ बुवाई की अवधि और काम की मंजूरी में अस्थायी संक्रमणकालीन ठहराव जैसे मौसमी कारकों को बताया है। हालांकि, यह बदलाव ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।

फंडिंग में बदलाव का राज्यों पर असर

पुरानी और नई प्रणाली के बीच एक मुख्य अंतर कार्यक्रम के वित्तपोषण (Funding) के तरीके में है। MGNREGA के तहत, केंद्र सरकार अकुशल मज़दूरी के लिए लगभग पूरा फंड मुहैया कराती थी। VB-G RAM G की नई संरचना में यह ज़िम्मेदारी बदल गई है। अब गैर-पहाड़ी राज्यों में योजना की 40% लागत राज्यों को वहन करनी होगी, जबकि हिमालयी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के लिए 90:10 का अनुपात बनाए रखा गया है। कई राज्यों के लिए, वित्तीय ज़िम्मेदारी में यह वृद्धि उनके बजट पर नया दबाव डालती है। अर्थशास्त्रियों को चिंता है कि यदि राज्य इन फंडों को जल्दी आवंटित करने में संघर्ष करते हैं, तो इससे काम की मंजूरी और मज़दूरी भुगतान में देरी हो सकती है, जिससे कार्यक्रम की पहुंच प्रभावी रूप से कम हो जाएगी।

मॉनसून की कमी और ग्रामीण मांग

मौसम के पैटर्न को देखते हुए इस बदलाव के समय पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। 18 अगस्त 2026 तक, भारत 13% वर्षा की कमी का सामना कर रहा है। बिहार जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जहां 40% की वर्षा की कमी देखी गई है, और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24% की कमी के साथ गंभीर कमी की सूचना है। पिछले वर्षों में, जब फसलें खराब होती थीं या बारिश में देरी होती थी, तो ग्रामीण रोज़गार योजनाएं आय के एक महत्वपूर्ण बफर के रूप में काम करती थीं। ग्रामीण मज़दूरी स्थिर रहने के साथ, काम के दिनों में कमी सीधे तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च योग्य आय को सीमित कर सकती है।

निवेशकों और बाज़ार विश्लेषकों के लिए, इस योजना का प्रदर्शन ग्रामीण उपभोग (Consumption) के रुझानों का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। ग्रामीण मांग फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG), दोपहिया वाहन (Two-wheelers) और ट्रैक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख चालक है। यदि ग्रामीण श्रमिकों को कम रोज़गार के अवसर मिलने से कम आय अर्जित होती है, तो इन क्षेत्रों की कंपनियों को बिक्री मात्रा और राजस्व वृद्धि में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।

आने वाले कुछ महीने महत्वपूर्ण होंगे। बाज़ार पर्यवेक्षक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या राज्य सरकारें कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए अपने बजट आवंटन को बढ़ाती हैं और क्या केंद्र सरकार बायोमेट्रिक उपस्थिति आवश्यकताओं जैसी कार्यान्वयन बाधाओं को दूर करने के लिए हस्तक्षेप करती है। आने वाली तिमाहियों में वास्तविक खर्च के आंकड़े यह स्पष्ट तस्वीर देंगे कि क्या नई प्रणाली अपने पूर्ववर्ती द्वारा प्रदान किए गए सुरक्षा जाल के पैमाने से मेल खा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.