Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने **2022-23** को बेस ईयर मानकर नई GDP सीरीज जारी की है। इसमें कंस्ट्रक्शन सेक्टर में निजी कंपनियों का दबदबा **111%** तक बढ़ा है, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिक (Formal) होने का संकेत है।
भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था की तस्वीर को बेहतर ढंग से समझने के लिए GDP की नई सीरीज पेश की है, जिसका बेस ईयर अब 2022-23 है। इस बदलाव ने अलग-अलग सेक्टरों के योगदान को मापने का तरीका बदल दिया है।\n\n### कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बड़ा उछाल\nनई गणना के मुताबिक, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों का ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) पिछले 2011-12 के आंकड़ों के मुकाबले 111% बढ़कर ₹7.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। अब सेक्टर में बड़ी निजी कंपनियों का हिस्सा 35.3% है। यह डेटा बताता है कि कंस्ट्रक्शन का काम अब ज्यादा व्यवस्थित हो रहा है, जिससे टैक्स कंप्लायंस और बैंक क्रेडिट की पहुंच आसान होने की उम्मीद है।\n\n### सर्विस सेक्टर की अलग कहानी\nकंस्ट्रक्शन के उलट, सर्विस सेक्टर में छोटे और अनौपचारिक बिजनेस का बोलबाला है। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर में घरेलू (Household) क्षेत्र का योगदान 54.6% से बढ़कर 60.6% हो गया है। वहीं, रोड ट्रांसपोर्ट में कॉर्पोरेट गतिविधियों में 56% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सर्विस सेक्टर के इन हिस्सों पर नजर रखना अब भी चुनौतीपूर्ण है।\n\n### डेटा के पीछे की हकीकत\nसरकार ने इस सीरीज में MCA-21 जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म और 'पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे' का सहारा लिया है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अभी भी 1997-2003 के 'लाइवस्टॉक सेंसस' जैसे पुराने बेंचमार्क का उपयोग हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि डेटा पूरी तरह से आधुनिक नहीं है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल साल-दर-साल के आंकड़ों को न देखें, बल्कि लॉन्ग-टर्म में हो रहे 'फॉर्मलाइजेशन' के ट्रेंड पर गौर करें।
