India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, **10 सितंबर** तक उत्तर और मध्य भारत में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा, जबकि दक्षिण भारत में सूखे की स्थिति बनी हुई है। इस असमान मानसून से खरीफ की फसलों को नुकसान और रूरल डिमांड पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
कृषि और रूरल डिमांड पर खतरा
मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लो-प्रेशर सिस्टम के कारण भारी बारिश हो रही है। जहां यह बारिश जमीन में नमी के लिए जरूरी है, वहीं इसकी अधिकता से धान और मक्का जैसी खरीफ की फसलों के खराब होने का डर सता रहा है। नमी या फ्लैश फ्लड्स के कारण कटाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जो सीधे तौर पर फूड इन्फ्लेशन को प्रभावित करेगी।
दूसरी ओर, दक्षिणी प्रायद्वीप में लंबे समय से बारिश की कमी से जल संकट गहरा गया है। इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा संकेत है, क्योंकि भारत की एक बड़ी रूरल इकोनॉमी कृषि पर निर्भर है। अगर मानसून ऐसा ही रहा, तो इसका असर ट्रैक्टर, टू-व्हीलर और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों की सेल्स पर पड़ सकता है।
मैक्रो इकोनॉमिक रिस्क और एलनिनो (El Niño)
बाजार के जानकारों की नजरें अब 'एलनिनो' (El Niño) कंडीशन्स पर टिकी हैं, जिसके चलते सितंबर में राष्ट्रीय स्तर पर बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही आगाह किया है कि अगर कृषि विकास धीमा रहा, तो इसका असर पूरे फाइनेंशियल ईयर की जीडीपी और रूरल ग्रोथ पर दिख सकता है। अब देखना होगा कि रिजर्वोयर लेवल्स (Reservoir Levels) क्या संकेत देते हैं, जो रबी फसलों के लिए बेहद अहम हैं।
