चालू फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती पांच महीनों में भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में **15%** से ज्यादा की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई है। हालांकि, इम्पोर्ट में बढ़त के चलते ट्रेड डेफिसिट का दायरा भी बढ़ा है, जिस पर निवेशकों की नजर है।
भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट ने वैश्विक उठापटक के बीच अपनी मजबूती दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) में एक्सपोर्ट में 15% से अधिक की ग्रोथ दर्ज की गई है।
आंकड़ों का गणित
अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि के डेटा पर नजर डालें तो एक्सपोर्ट $173.78 बिलियन तक पहुंच गया है, जो कि 17.04% की बढ़ोतरी है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि इसी दौरान इम्पोर्ट भी 19.27% बढ़कर $292.38 बिलियन हो गया है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि बढ़ता ट्रेड डेफिसिट देश के करंट अकाउंट बैलेंस और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिहाज से मॉनिटर करने वाला अहम फैक्टर है।
एक्सपोर्ट का मुख्य इंजन
ग्रोथ को मुख्य रूप से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स और इंजीनियरिंग आइटम्स से मजबूती मिली है। ग्लोबल महंगाई के बावजूद इन सेक्टरों ने अपनी रफ्तार बरकरार रखी है।
BRICS और 'जयपुर कंसेंसस'
सरकार अब ट्रेड फाइनेंस को आसान बनाने पर जोर दे रही है। जयपुर में आयोजित 16वीं BRICS ट्रेड मिनिस्टर्स मीटिंग में भारत ने 'जयपुर कंसेंसस' का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद $2.5 ट्रिलियन के ग्लोबल ट्रेड फाइनेंस गैप को पाटना है, ताकि MSMEs को वैश्विक बाजार में बेहतर मौके मिलें। इसके तहत एक 'इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म' लागू करने की बात कही गई है, जिससे एक्सपोर्टर्स को पेमेंट जल्दी मिल सके।
आगे के लिए, 15 सितंबर 2026 को आने वाले आधिकारिक ट्रेड डेटा पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी, जिससे सेक्टर की परफॉर्मेंस और डेफिसिट की सटीक स्थिति साफ हो सकेगी।
