India's Manufacturing Shift: ग्लोबल इंडस्ट्रियल रेस में भारत की डगर कितनी कठिन?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India's Manufacturing Shift: ग्लोबल इंडस्ट्रियल रेस में भारत की डगर कितनी कठिन?

भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर खड़ा करने के लिए एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। सब्सिडी के अंतर और स्ट्रक्चरल बाधाओं के बीच, निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी है कि कंपनियां रॉ मटेरियल से हाई-वैल्यू प्रोडक्शन की तरफ कैसे बढ़ती हैं।

दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जैसे अमेरिका, चीन, जापान और यूरोपियन यूनियन अपनी इंडस्ट्रियल पॉलिसीज पर भारी पूंजी खर्च कर रही हैं। इस ग्लोबल रेस में भारत का शेयर अभी काफी कम है। ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग जायंट्स के मुकाबले लोकल फर्म्स के लिए प्राइस और स्केल के मामले में टिके रहना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

रॉ मटेरियल से 'वैल्यू-एडेड' प्रोडक्ट्स तक का सफर

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग की सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल समस्या है रॉ कैपेसिटी को फिनिश्ड गुड्स में न बदल पाना। UNIDO के डेटा के मुताबिक, भारत मेटल और टेक्सटाइल जैसे बेसिक रॉ मटेरियल का बड़ा उत्पादक है, लेकिन हाई-वैल्यू फिनिश्ड गुड्स के मामले में अभी काफी पीछे है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि जो कंपनियां हाई-एंड मशीनरी या फिनिश्ड अपैरल की तरफ शिफ्ट हो रही हैं, उनके मार्जिन बेहतर रहने की संभावना है, जबकि रॉ मटेरियल पर टिकी कंपनियां कमोडिटी प्राइस के उतार-चढ़ाव में ज्यादा फंसती हैं।

टैलेंट और इकोसिस्टम का गैप

भारत के पास हाई-स्पेसिफिकेशन मशीनिंग और मैटेरियल साइंस में मजबूत रिसर्च बेस है, लेकिन बड़ा टैलेंट पूल घरेलू कंपनियों के बजाय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में जा रहा है। इसका नुकसान यह है कि भारत का अपना इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी घरेलू असेंबली लाइन्स को मजबूत करने के बजाय ग्लोबल कॉर्पोरेट्स के काम आ रहा है।

ट्रेड एग्रीमेंट्स और भविष्य के जोखिम

साल 2027-28 तक होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) भारत के लिए मौके और जोखिम दोनों लेकर आएंगे। अगर देश में बिजनेस करने की लागत (Cost of doing business) ज्यादा रही, तो खतरा यह है कि विदेशी कंपनियां भारत में फैक्ट्री लगाने के बजाय अपने विदेशी हब्स से ही सप्लाई करना पसंद करेंगी। भविष्य में उन्हीं कंपनियों की जीत होगी जो अपनी प्रोडक्टिविटी सुधारेंगी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में ग्लोबल शिफ्ट के हिसाब से खुद को ढालेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.