MSME Exports: भारतीय MSMEs का बड़ा धमाका, एक्सपोर्ट का आंकड़ा पहुंचा **₹12.39 लाख करोड़** के पार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
MSME Exports: भारतीय MSMEs का बड़ा धमाका, एक्सपोर्ट का आंकड़ा पहुंचा **₹12.39 लाख करोड़** के पार

भारत के MSME सेक्टर ने वित्त वर्ष 2024-25 में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। एक्सपोर्ट का आंकड़ा **₹12.39 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, जबकि **1.73 लाख** से अधिक कंपनियां अब ग्लोबल मार्केट का हिस्सा बन चुकी हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSMEs की भूमिका लगातार बड़ी होती जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस सेक्टर का कुल एक्सपोर्ट वैल्यू 2024-25 फाइनेंशियल ईयर में ₹12.39 लाख करोड़ दर्ज किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि 2020-21 में यह आंकड़ा महज ₹3.95 लाख करोड़ था। इस शानदार उछाल के पीछे एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों की संख्या में हुई भारी बढ़ोतरी है, जो 52,800 से बढ़कर अब 1.73 लाख को पार कर गई है।

विकास के पीछे की ताकत

इस ग्रोथ के पीछे बेहतर डिजिटल पहुंच और सुधरती लॉजिस्टिक व्यवस्था का बड़ा हाथ है। वर्ल्ड बैंक के लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की 38वीं रैंक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान भेजने की लागत को अधिक अनुमानित और आसान बना दिया है। इसके अलावा, डिजिटल मार्केटप्लेस की मदद से छोटी कंपनियां बिना किसी बड़े ऑफिस सेटअप के ग्लोबल ग्राहकों तक पहुंचने में कामयाब हो रही हैं। Walmart Vriddhi जैसे प्रोग्राम्स ने भी हजारों छोटे कारोबारियों को डिजिटल ऑपरेशन्स के लिए ट्रेन किया है।

सेक्टर के सामने चुनौतियां

हालांकि, एक चिंता का विषय यह भी है कि एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा कुछ ही कंपनियों के पास है। महज 0.3% मीडियम-साइज की कंपनियां कुल एक्सपोर्ट का 40% हिस्सा संभाल रही हैं। इसका मतलब है कि भविष्य की ग्रोथ के लिए माइक्रो-यूनिट्स को बड़े स्तर पर ढालना बहुत जरूरी है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इन्वेस्टर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि एक्सपोर्ट का विस्तार जोखिमों के साथ आता है। छोटी कंपनियों को अभी भी फॉर्मल क्रेडिट और वर्किंग कैपिटल की कमी का सामना करना पड़ता है। समय पर भुगतान न मिलना भी एक बड़ी समस्या है, जिसे सुलझाने के लिए सरकार ने 'MSME Samadhaan' पोर्टल लॉन्च किया है। इसके अलावा, इंटरनेशनल पैकेजिंग और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पालन करना इन छोटी कंपनियों के लिए एक बड़ी परीक्षा है। लॉजिस्टिक्स, फिनटेक और शिपिंग सेक्टर की कंपनियों के लिए यह ट्रेंड मौके लेकर आ रहा है, क्योंकि अब छोटी इकाइयों को अधिक ट्रेड फाइनेंसिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन सपोर्ट की जरूरत होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.