ग्लोबल मार्केट में कैपिटल रोटेशन के चलते MSCI Emerging Markets Index में भारत की हिस्सेदारी गिरकर करीब **11%** रह गई है, जो **2024** में **20%** के करीब थी।
इंडेक्स में बदलाव की असली वजह
साल 2026 की शुरुआत से ही ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल पैसा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है। इसकी मुख्य वजह है AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर सेक्टर में दिख रही भारी डिमांड। TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों ने इस साल मार्केट रिटर्न में दबदबा बनाए रखा है, जिससे उनका मार्केट कैपिटलाइजेशन काफी बढ़ गया है।
इस भारी बदलाव के कारण भारत के दिग्गज शेयर जैसे HDFC Bank और Reliance Industries अब MSCI Emerging Markets Index की टॉप 10 कंपनियों की लिस्ट से बाहर हो गए हैं।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
दुनिया भर के कई इमर्जिंग मार्केट फंड 'पैसिव' (Passive) तरीके से काम करते हैं, यानी वे इंडेक्स की संरचना को सीधे फॉलो करते हैं। भारत का वेटेज घटने का सीधा मतलब है कि इन फंड्स से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, 2026 की शुरुआत में MSCI इंडिया इंडेक्स अपने एशियाई साथियों के मुकाबले 70% तक के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था, जिसने ग्लोबल मैनेजर्स के लिए इसे कम आकर्षक बना दिया।
आगे क्या उम्मीद करें?
इंडेक्स में टेक्नोलॉजी दिग्गजों की बढ़ती हिस्सेदारी ने निवेशकों के लिए जोखिम का प्रोफाइल भी बदल दिया है। अब बाजार के जानकार विदेशी निवेशकों (FIIs) की एक्टिविटी पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि लगातार आउटफ्लो से डॉलर के मुकाबले रिटर्न पर दबाव बन सकता है। अब देखना यह है कि भारतीय कंपनियां अपने मौजूदा प्रीमियम वैल्यूएशन को मुनाफे के दम पर कैसे जस्टिफाई करती हैं।
