भारत सरकार ने 2026-27 के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए **₹12.2 लाख करोड़** का भारी-भरकम आवंटन किया है। इसके साथ ही 'Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Act, 2025' को लागू किया गया है, जिसमें 100% FDI की छूट दी गई है। यह कदम प्रोजेक्ट्स के रिस्क को कम करने और ग्लोबल एक्सपर्टाइज लाने की एक बड़ी कोशिश है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा का नया रोडमैप
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अभी एक बड़े विस्तार के दौर से गुजर रहा है। बजट में ₹12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य रखा गया है। डेटा सेंटर्स से लेकर एडवांस एनर्जी ग्रिड्स तक, अब ध्यान सिर्फ निर्माण पर नहीं, बल्कि उन संपत्तियों की सुरक्षा पर भी है। बड़ी चुनौती क्लाइमेट इवेंट्स, साइबर थ्रेट्स और ऑपरेशनल देरी से होने वाले नुकसान की है।
FDI और नए नियमों का असर
5 फरवरी, 2026 से लागू हुए 'Sabka Bima Sabki Raksha' एक्ट के तहत अब इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी मिल गई है। इससे ग्लोबल री-इंश्योरेंस कंपनियां भारत आएंगी, जो जटिल प्रोजेक्ट्स के रिस्क को मैनेज करने में अपनी अंडरराइटिंग स्किल्स का इस्तेमाल करेंगी।
रिस्क-बेस्ड कैपिटल (RBC) फ्रेमवर्क
इंश्योरेंस कंपनियां अब एक बड़े बदलाव से गुजर रही हैं। पुराने फॉर्मूला-बेस्ड सिस्टम की जगह अब 'Risk-Based Capital' फ्रेमवर्क अपनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब अपनी होल्डिंग्स के वास्तविक रिस्क के हिसाब से कैपिटल रिजर्व रखना होगा। हालांकि यह सिस्टम मजबूत है, लेकिन घरेलू कंपनियों के लिए ऑपरेशंस में बड़े बदलाव की चुनौती बनी हुई है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
बाजार में विदेशी कंपनियों के आने से घरेलू कंपनियों पर कॉम्पिटिशन का दबाव बढ़ सकता है। क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (Claim Settlement Ratio) अभी भी एक बड़ी चिंता का विषय है, जिस पर रेगुलेटर की पैनी नजर है। आने वाले समय में 'Bima Sugam' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का रोल अहम होगा। निवेशकों के लिए असली ट्रैक करने वाली बात यह होगी कि क्या ये सुधार क्लेम सेटलमेंट में सुधार लाते हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग को स्थिर बनाते हैं।
