Household Debt: भारत में संपत्ति से तेज बढ़ा कर्ज, 2025 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Household Debt: भारत में संपत्ति से तेज बढ़ा कर्ज, 2025 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

साल 2025 में भारतीय परिवारों की फाइनेंशियल एसेट्स बढ़कर **$5.3 ट्रिलियन** हो गई हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि कर्ज (Liabilities) **14.3%** की तेजी से बढ़ रहे हैं। छोटे शहरों और युवाओं की बाजार में भागीदारी तो बढ़ी है, लेकिन संपत्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी चंद हाथों में सिमटा है।

साल 2025 में भारतीय परिवारों की आर्थिक स्थिति में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। जहां ग्रॉस फाइनेंशियल एसेट्स 9% बढ़कर $5.3 ट्रिलियन के स्तर पर पहुंच गई हैं, वहीं परिवारों पर कर्ज यानी लायबिलिटीज में 14.3% का बड़ा उछाल आया है। यह बढ़ती खाई इस ओर इशारा करती है कि अब ज्यादा लोग अपनी कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्रेडिट पर निर्भर हो रहे हैं, जो भविष्य के लिए वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

युवा और छोटे शहर बदल रहे हैं तस्वीर

निवेशकों की प्रोफाइल भी तेजी से बदल रही है। आंकड़ों के मुताबिक, 30 साल से कम उम्र के निवेशक अब कुल निवेशक आधार का 38% हिस्सा हैं। इसके अलावा, बाजार की पहुंच अब महानगरों तक सीमित नहीं रही। फाइनेंशियल ईयर 2025 में NSE पर रजिस्टर होने वाले 70% ट्रेडर्स टॉप 10 जिलों के बाहर से आए हैं। डिजिटल टूल्स और SIPs ने आम लोगों के लिए मार्केट में एंट्री करना आसान बना दिया है।

बचत का आधार क्या है?

इक्विटी और म्यूचुअल फंड्स की धूम के बावजूद, भारतीय परिवारों की बचत का सबसे बड़ा हिस्सा आज भी बैंक डिपॉजिट्स में है, जिसकी हिस्सेदारी 40.2% है। इसके बाद सिक्योरिटीज का नंबर आता है, जिसकी हिस्सेदारी 32.7% है। यह साफ दिखाता है कि जोखिम लेने के बावजूद, भारतीय निवेशक अभी भी सुरक्षित और फिक्स्ड रिटर्न देने वाले इंस्ट्रूमेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

संपत्ति का असमान वितरण

देश की आर्थिक संरचना की सबसे बड़ी चुनौती संपत्ति का असमान वितरण है। आज भी टॉप 10% परिवारों के पास देश की कुल नेट फाइनेंशियल एसेट्स का 65% हिस्सा है। हालांकि मार्केट पार्टिसिपेशन बढ़ा है, लेकिन यह आंकड़ा बताता है कि इससे राष्ट्रीय संपत्ति के वितरण में अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

जानकारों का मानना है कि कर्ज और कमाई के बीच बढ़ता फासला एक चेतावनी है। यदि कर्ज इसी तरह एसेट्स से ज्यादा तेजी से बढ़ता रहा, तो डिस्पोजेबल इनकम कम हो जाएगी, जिसका असर कंजम्पशन और बाजार में आने वाले इनफ्लो पर पड़ेगा। अब सबकी नजरें Reserve Bank of India (RBI) के डेटा पर हैं, जो यह तय करेगा कि कर्ज का यह दबाव आने वाले समय में कैसे कंट्रोल होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.