Green Tech: भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर के सामने 'Valley of Death' का बड़ा संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Green Tech: भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर के सामने 'Valley of Death' का बड़ा संकट

भारत ने 2024 में अपने पावर सेक्टर के निवेश का **83%** हिस्सा केवल मैच्योर क्लीन एनर्जी में लगाया है। इससे शुरुआती दौर के इनोवेशन के लिए फंड की कमी हो गई है, जिससे विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ने का जोखिम पैदा हो गया है।

भारत ने सोलर और विंड पावर को तेजी से अपनाने में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन फाइनेंशियल सिस्टम में एक बड़ा गैप नई क्लाइमेट इनोवेशन की राह रोक रहा है। 2024 में पावर सेक्टर की कुल पूंजी का करीब 83% हिस्सा स्थापित रिन्यूएबल टेक्नोलॉजी में चला गया। यह सफलता तो है, लेकिन यह उस 'Valley of Death' को भी उजागर करता है जहाँ नई क्लाइमेट टेक्नोलॉजी को फंड नहीं मिल पा रहा है।

क्यों है फंडिंग का गैप?

यह दिक्कत निवेशकों की कार्यप्रणाली के कारण है। कमर्शियल बैंक सुरक्षित और फिक्स्ड इनकम वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देते हैं, जबकि वेंचर कैपिटल केवल हाई-ग्रोथ मौकों की तलाश में रहती है। एडवांस्ड बैटरी स्टोरेज या हाइड्रोजन जैसे अर्ली-स्टेज इनोवेशन न तो बैंकों की लिस्ट में फिट बैठते हैं और न ही वेंचर कैपिटल के मानकों पर। नतीजतन, कई बेहतरीन डोमेस्टिक इनोवेशन पायलट स्टेज से आगे ही नहीं बढ़ पाते।

भविष्य का जोखिम और समाधान

अगर भारत ने स्थानीय स्तर पर लो-कार्बन सॉल्यूशंस विकसित नहीं किए, तो स्टील, सीमेंट और केमिकल जैसे प्रमुख उद्योगों को विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहना पड़ेगा। हालांकि, सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का 'रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फंड' बनाया है, लेकिन इसका दायरा स्पेस और AI तक फैला होने के कारण क्लाइमेट इनोवेशन को पर्याप्त हिस्सा नहीं मिल पा रहा है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को 'फर्स्ट-लॉस गारंटी' जैसे टूल्स लाने चाहिए, जहाँ शुरुआती नुकसान की भरपाई सरकार करे। साथ ही, पब्लिक सेक्टर कंपनियों को 'फर्स्ट कस्टमर' बनकर नई टेक्नोलॉजी का भरोसा जगाना होगा। मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार आने वाले समय में ब्रॉड-बेस्ड फंडिंग से हटकर टारगेटेड रिस्क-शेयरिंग मैकेनिज्म की ओर कदम बढ़ाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.