India's GDP: बड़ा झटका! $30 ट्रिलियन का सपना हुआ धुंधला? GDP आंकड़ों में निकली गड़बड़ी

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AuthorNeha Patil | Whalesbook News Team

Overview

भारत की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) को लेकर एक बड़ी खबर आई है। हाल ही में जारी किए गए संशोधित GDP आंकड़ों से पता चला है कि पिछली गणनाओं में **3-4%** तक की ओवरएस्टीमेशन (अधिक आकलन) हुई थी। इसके साथ ही, रुपये में आई कमजोरी के चलते डॉलर के मुकाबले भारत की GDP ग्रोथ धीमी पड़ गई है, जिससे देश के महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्यों किए गए GDP आंकड़े रिवाइज?

सरकार ने GDP की नई सीरीज जारी की है, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर (आधार वर्ष) बनाया गया है। पहले 2011-12 को बेस ईयर माना जाता था। आंकड़ों में यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि पुराना बेस ईयर काफी पुराना हो चुका था और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के राष्ट्रीय खातों की गणना पद्धति पर चिंता जताई थी। इस नए मूल्यांकन से भारत के आर्थिक विकास की तस्वीर थोड़ी बदली हुई नज़र आ रही है।

क्या है ओवरएस्टीमेशन का मतलब?

आंकड़ों के अनुसार, नई गणना पद्धति से पता चला है कि पहले नॉमिनल GDP (नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद) का अनुमान 3-4% तक बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था। इसमें डबल डिफ्लेशन जैसी बेहतर पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया और नई सर्वे डेटा को शामिल किया गया। हालांकि, कुछ सेक्टर्स में अभी भी सिंगल डिफ्लेशन का उपयोग चिंता का विषय है, खासकर तब जब इनपुट और आउटपुट कीमतों में अंतर हो। पुरानी गणना प्रणाली में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के लिए केवल औपचारिक क्षेत्र के डेटा पर निर्भर रहना भी एक बड़ी वजह थी, जो नोटबंदी और GST जैसे घटनाओं से बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे गलतियां हुईं।

सेक्टरों पर कैसा असर?

GDP की इस समीक्षा का असर अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रों पर अलग-अलग पड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था का 56% से अधिक हिस्सा संभालने वाला सर्विसेज सेक्टर (सेवा क्षेत्र) 7-8% तक नीचे रिवाइज किया गया है। वहीं, कृषि जैसे प्राइमरी सेक्टर में 4-6% तक का इजाफा हुआ है। यह बदलाव अहम है क्योंकि सेवा क्षेत्र हमेशा से भारत की ग्रोथ का मुख्य इंजन रहा है।

रुपये की कमजोरी और $30 ट्रिलियन का लक्ष्य

कमजोर भारतीय रुपये (Indian Rupee) का असर भी GDP के डॉलर मूल्य पर साफ दिख रहा है। जिस अवधि का विश्लेषण किया गया, उसमें रुपया ₹80 से गिरकर ₹88 के स्तर पर आ गया। इसके चलते, डॉलर के मुकाबले भारत की GDP दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से खिसककर छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है।

2047 तक $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य अब और भी चुनौतीपूर्ण लग रहा है। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत को डॉलर के संदर्भ में लगातार 9.2% से 13% तक की नॉमिनल GDP ग्रोथ हासिल करनी होगी। मौजूदा स्थिति और पिछली गणनाओं की पद्धति पर उठ रहे सवालों को देखते हुए यह लक्ष्य पाना कठिन दिख रहा है।

भविष्य की राह

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान लगाया है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा। वर्ल्ड बैंक भी FY26 में ग्रोथ बढ़कर 7.6% होने की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, इस ग्रोथ को बनाए रखने और लंबे समय के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय खातों की गणना पद्धति को सुधारना, मुद्रास्फीति (Inflation) के उतार-चढ़ाव को संभालना और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटना अहम होगा। विश्लेषकों का कहना है कि भले ही डॉलर GDP रैंकिंग बदलती रहे, लेकिन लगातार वास्तविक ग्रोथ और ढांचागत सुधार (Structural Reforms) ही देश की असली आर्थिक प्रगति की कुंजी हैं।

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