Indian Economy: GDP ने मारी **7.8%** की छलांग, फिर भी सुस्त क्यों है शेयर बाजार?

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Economy: GDP ने मारी **7.8%** की छलांग, फिर भी सुस्त क्यों है शेयर बाजार?

भारत की इकॉनमी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में **7.8%** की शानदार रफ्तार पकड़ी है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का **9.2%** योगदान रहा। हालांकि, रेटिंग अपग्रेड के बावजूद शेयर बाजार में सुस्ती है, क्योंकि निवेशक SEBI के नए नियमों और ग्लोबल तनाव को लेकर सतर्क हैं।

देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अपनी ताकत दिखाई है। GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंच गई है, जो बाजार के अनुमानों से बेहतर है। इस विकास में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की 9.2% की उछाल और ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 11.9% की बढ़ोतरी का अहम रोल रहा। सर्विस सेक्टर की मजबूती ने भी वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश की इकॉनमी को संभाले रखा है।

बाजार में सुस्ती की वजह क्या है?

इतनी अच्छी ग्रोथ के बावजूद शेयर बाजार सीमित दायरे (Range-bound) में क्यों फंसा है? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण SEBI द्वारा 3 अगस्त, 2026 को लागू किया गया 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) है। F&O सेगमेंट के शेयरों की क्लोजिंग प्राइस कैलकुलेशन के नए तरीके ने ट्रेडर्स के बीच अस्थिरता पैदा की है, जिससे सेंटीमेंट पर दबाव बना हुआ है।

ग्लोबल तनाव और चुनौतियां

हालांकि Japan Credit Rating Agency (JCR) ने 2 सितंबर, 2026 को भारत की सॉवरेन रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- किया है, जो राजकोषीय अनुशासन का प्रमाण है, लेकिन विदेशी मोर्चे पर मुश्किलें कम नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और एनर्जी की कीमतों में संभावित उछाल निवेशकों को डरा रहा है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी और 19% की हेल्दी क्रेडिट ग्रोथ के बावजूद, नेगेटिव रियल पॉलिसी रेट्स का डर मार्केट को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और SEBI के नए नियमों का असर बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.