RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक, अगर ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता कम होती है, तो भारत की GDP ग्रोथ **8%** तक पहुंचने की क्षमता रखती है।
RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने संकेत दिए हैं कि भारत की रियल GDP ग्रोथ की क्षमता मौजूदा स्तर से कहीं बेहतर 8% के करीब है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में ग्लोबल स्तर पर आए झटकों की वजह से इस रफ्तार पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार 7% से ऊपर की ग्रोथ बनाए रखने में कामयाब रही है।
ग्लोबल अस्थिरता और मजबूती
भारत का अब एक अधिक डायवर्सिफाइड (diversified) इकोनॉमिक मॉडल की ओर शिफ्ट होना इस मजबूती का मुख्य कारण है। देश ने अब किसी एक इंडस्ट्री पर निर्भरता कम की है और ऑयल प्राइसेस (oil prices) या खराब मानसून जैसे पारंपरिक जोखिमों से निपटने के लिए अपनी नींव को मजबूत किया है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अब घरेलू डिमांड और मजबूत पॉलिसी फ्रेमवर्क ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बन गए हैं।
भविष्य की राह और रिस्क फैक्टर्स
फिलहाल 8% के लक्ष्य को हासिल करने में ग्लोबल फाइनेंसिंग कंडीशंस और एनर्जी प्राइसेस में होने वाली उठापटक सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। अगर ग्लोबल माहौल स्थिर होता है, तो भारत अपनी मौजूदा ग्रोथ रेट में 0.5% से 1% तक का इजाफा कर सकता है।
सरकार का फिस्कल प्रूडेंस (fiscal prudence) पर फोकस बना हुआ है, जिससे डेट-टू-GDP रेशियो (debt-to-GDP ratio) के नीचे आने की उम्मीद है। यह मार्केट के लिए एक पॉजिटिव संकेत है, क्योंकि इससे देश की क्रेडिट रेटिंग और सरकारी खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ता है। आने वाले समय में निवेशकों को ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस और फिस्कल अनुशासन पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही वो मुख्य पैरामीटर्स हैं जो भारत की ग्रोथ की रफ्तार तय करेंगे।
