India GCCs का बड़ा ऐलान: FY27 में हायरिंग बढ़ेगी, AI स्किल्स पर फोकस

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AuthorAditya Rao|Published at:
India GCCs का बड़ा ऐलान: FY27 में हायरिंग बढ़ेगी, AI स्किल्स पर फोकस

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) FY27 में अपनी हायरिंग बढ़ाने की तैयारी में हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, **52%** कंपनियां नई नियुक्तियां करने की योजना बना रही हैं। खास बात यह है कि अब AI स्किल्स की मांग बढ़ी है, लेकिन साथ ही वेतन लागत में वृद्धि और **40%** के स्किल गैप पर निवेशकों को नज़र रखनी होगी।

FY27 में GCCs की बड़ी विस्तार योजना

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) वित्तीय वर्ष 2027 के लिए बड़े विस्तार की योजना बना रहे हैं। Taggd-CII उद्योग सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इन सेंटर्स में 52% कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाएंगी। यह पिछले साल के 47% से अधिक है। यह दिखाता है कि मल्टीनेशनल कंपनियां भारत को अपने ग्लोबल ऑपरेशंस और इनोवेशन स्ट्रैटेजी के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र मानती हैं।

हायरिंग का बदलता स्वरूप: AI पर फोकस

जहां तक ​​रोजगार का सवाल है, तो तस्वीर बदल रही है। अब पहले की तरह बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त करने के बजाय, कंपनियां खास स्किल्स वाले लोगों को टारगेट कर रही हैं। GCCs सिर्फ पद भरने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि तकनीकी गैप को भरने के लिए विशिष्ट कौशल सेट की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती करियर वाले लोग, यानी फ्रेशर्स और 5 साल तक का अनुभव रखने वाले प्रोफेशनल, हायरिंग का बड़ा फोकस बने हुए हैं, जो कुल हायरिंग का 46% हैं। हालांकि, कंपनियां अब अधिक चुनिंदा हो रही हैं और नए कर्मचारियों को जल्द से जल्द प्रोडक्टिव बनाने के लिए छोटे, केंद्रित ट्रेनिंग बैच ले रही हैं।

AI स्किल्स की चुनौती

इस हायरिंग शिफ्ट का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से अपनाना है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग आधे GCCs ने बताया कि उनके 25% से अधिक ओपन रोल्स के लिए AI से संबंधित विशेषज्ञता की आवश्यकता है। यह बदलाव उन कंपनियों के लिए ज़रूरी है जो इनोवेशन में आगे रहना चाहती हैं, लेकिन इससे एक मुश्किल ऑपरेटिंग माहौल बन गया है। सेक्टर वर्तमान में AI और प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग रोल्स के लिए विशेष प्रतिभा में 36% से 40% की कमी का सामना कर रहा है। यह कमी सिर्फ HR की चुनौती नहीं है; यह प्रोजेक्ट डिलीवरी को भी प्रभावित कर रही है, 50% से अधिक GCCs महत्वपूर्ण तकनीकी भूमिकाओं को जल्दी से भरने में असमर्थता के कारण प्रोडक्ट लॉन्च में देरी की रिपोर्ट कर रहे हैं।

वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिम

निवेशकों को हेडलाइन विस्तार संख्याओं से परे जाकर अंतर्निहित लागतों को समझने की आवश्यकता है। यह उद्योग बाहरी प्रतिभा पर बहुत अधिक निर्भर है, जो सभी नई नियुक्तियों का 78% है। इस प्रतिभा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा IT सेवा कंपनियों, अन्य GCCs और प्रोडक्ट स्टार्टअप्स से आता है। प्रतिस्पर्धी बाजार में बाहरी हायरिंग पर यह उच्च निर्भरता मुआवजे में मुद्रास्फीति को बढ़ा रही है, क्योंकि कंपनियां कुशल पेशेवरों के लिए आक्रामक बोली लगा रही हैं।

यह वेज इन्फ्लेशन ऑपरेटिंग मार्जिन के लिए एक संभावित बाधा है। जैसे-जैसे GCCs AI-प्रोफिशिएंट श्रमिकों की सीमित आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, बढ़ती पेरोल लागत लाभप्रदता पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, लगभग आधे महत्वपूर्ण भूमिकाओं को भरने में 60 दिनों से अधिक का समय लगने के साथ, विलंबित उत्पादकता की लागत बढ़ रही है। इन खर्चों को प्रबंधित करने में इन सेंटरों की आंतरिक री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग कार्यक्रमों की ओर बढ़ने की क्षमता एक महत्वपूर्ण कारक होगी। आने वाली तिमाहियों के लिए मुख्य मॉनिटर करने वाली बात यह होगी कि ये फर्म विशेष AI प्रतिभा को प्राप्त करने और बनाए रखने की बढ़ती लागत के साथ अपनी आक्रामक विकास योजनाओं को कितनी प्रभावी ढंग से संतुलित कर पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.