चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों में भारत का फिस्कल डेफिसिट **₹4.55 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है, जो सालाना लक्ष्य का **26.8%** है। पिछले साल इसी अवधि में यह **29.9%** था।
भारत सरकार के फिस्कल डेफिसिट के ताजा आंकड़े जारी हो गए हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 की अवधि में यह ₹4.55 लाख करोड़ दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पूरे साल के टारगेट का 26.8% है, जो पिछले साल के 29.9% के मुकाबले वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) की बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
सरकारी खजाने की सेहत क्यों सुधरी?
सरकारी राजस्व में उछाल इसका बड़ा कारण रहा है। चार महीनों में कुल प्राप्तियां ₹13.07 लाख करोड़ तक पहुंच गई हैं, जो बजट टारगेट का 35.8% है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका Reserve Bank of India (RBI) से मिले बड़े डिविडेंड ने निभाई है, जिसने सरकारी तिजोरी को मजबूत किया है। इससे सरकार को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च जारी रखने में मदद मिली है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सिडी का गणित
सरकार ने सड़क परिवहन मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) और रेलवे सेक्टर में भारी निवेश जारी रखा है। हालांकि, चिंता का विषय सब्सिडी का बढ़ता खर्च है। जुलाई के अंत तक सरकार अपने सालाना सब्सिडी बजट का 37% खर्च कर चुकी है, जो पिछले साल इसी समय तक 30% था।
खाद्य, ईंधन और उर्वरकों पर बढ़ती सब्सिडी का खर्च आने वाले महीनों में सरकार के फिस्कल गणित पर दबाव डाल सकता है। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या टैक्स कलेक्शन की गति इसी तरह बनी रहती है और सरकार बढ़ती सब्सिडी के साथ विकास कार्यों का संतुलन कैसे बनाए रखती है।
