Fiscal Deficit: सरकारी खजाने पर दबाव, पहली छमाही में ही लक्ष्य का **42%** पार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Fiscal Deficit: सरकारी खजाने पर दबाव, पहली छमाही में ही लक्ष्य का **42%** पार

चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में भारत का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) बढ़कर **₹7.14 लाख करोड़** पहुंच गया है। यह सालाना लक्ष्य का **42.1%** हिस्सा है, जिससे **4.3%** के जीडीपी (GDP) डेफिसिट टारगेट को पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है।

चुनौती भरा रहा पहला हाफ

आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार की स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी अलग है। पिछले साल इसी अवधि में फिस्कल डेफिसिट बजट लक्ष्य का 36.5% था, जो अब बढ़कर 42.1% हो गया है। सरकार का कुल खर्च इस दौरान बढ़कर ₹25.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में 10% की बढ़त देखी गई है।

कैपेक्स में सुस्ती

सरकार का पूरा जोर हमेशा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) पर रहता है, लेकिन इस बार यहां रफ्तार धीमी हो गई है। पहली तिमाही में जहां इसमें 23.7% की तेजी थी, वहीं दूसरी तिमाही में यह गिरकर महज 2.8% रह गई। अब साल के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दूसरी छमाही में इसमें 16.2% की बढ़ोतरी की दरकार है, जो मौजूदा हालात में काफी मुश्किल दिख रहा है।

राजस्व की सुस्त रफ्तार

टैक्स कलेक्शन में केवल 6.1% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है, जो खर्च के मुकाबले काफी कम है। सितंबर अंत तक नेट टैक्स रेवेन्यू ₹12.76 लाख करोड़ रहा। ICRA के विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो सरकार को ₹1.3 लाख करोड़ से ₹1.4 लाख करोड़ तक का फिस्कल स्लिपेज झेलना पड़ सकता है। इसमें फर्टिलाइजर और फ्यूल सब्सिडी का बढ़ता बोझ बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अब निवेशकों की नजर सरकार के टैक्स जुटाने के प्रयासों और बचे हुए महीनों में खर्च की रणनीति पर टिकी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.