2008 के वित्तीय संकट के 18 साल बाद: क्या आज सुरक्षित है भारत का इकोनॉमिक स्ट्रक्चर?

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
2008 के वित्तीय संकट के 18 साल बाद: क्या आज सुरक्षित है भारत का इकोनॉमिक स्ट्रक्चर?

2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के 18 साल बाद भारतीय वित्तीय प्रणाली पहले से कहीं अधिक मजबूत है। रिकॉर्ड फॉरेक्स रिजर्व और बेहतर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के साथ देश बाहरी झटकों का सामना करने के लिए तैयार है।

2008 से 2026 तक का सफर

वर्ष 2008 में जब Lehman Brothers के पतन ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया था, तब भारत को मुख्य रूप से ट्रेड और कैपिटल आउटफ्लो के कारण अस्थिरता का सामना करना पड़ा था। हालांकि, 2026 तक आते-आते भारत का वित्तीय ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। आज देश के पास बफर के तौर पर कहीं अधिक सुरक्षा कवच मौजूद हैं।

बैंकिंग सेक्टर में सुधार

2008 के बाद भारतीय बैंकों के सामने बैड लोन्स और स्ट्रेस्ड एसेट्स की बड़ी चुनौती थी, लेकिन आज स्थिति उलट है। बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट को काफी हद तक साफ कर लिया है और ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) अपने मल्टी-ईयर लो पर हैं। Reserve Bank of India (RBI) की सक्रिय निगरानी ने क्रेडिट ग्रोथ और लिक्विडिटी को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बना दिया है।

नए सुरक्षा कवच

अब देश के पास Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) जैसा ठोस कानूनी ढांचा है, जो 2008 के दौरान नदारद था। इसके अलावा, आम निवेशकों के लिए deposit insurance (DICGC) को बढ़ाकर ₹5 लाख तक कर दिया गया है, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा और बढ़ा है।

फॉरेक्स रिजर्व का दम

आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर है। यह रिजर्व सेंट्रल बैंक को वैश्विक झटकों और करेंसी की उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए एक बड़ा सपोर्ट सिस्टम देता है।

क्या AI में है कोई खतरा?

आजकल मार्केट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर है। 2008 का संकट सबप्राइम मॉर्गेज से पैदा हुआ था, जबकि मौजूदा AI उछाल मजबूत कैश फ्लो वाली कंपनियों के इर्द-गिर्द है। हालांकि, निवेशकों को सावधान रहना चाहिए कि कहीं नई टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स में भारी कर्ज (Debt) का इस्तेमाल न होने लगे, क्योंकि यह जोखिम प्रोफाइल को बदल सकता है। निवेशकों को ग्लोबल लिक्विडिटी और ब्याज दरों के रुझानों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.