भारत का फेस्टिव रिटेल सीजन इस बार उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। हाई इन्फ्लेशन (Inflation) और महंगे हवाई सफर के चलते आम लोगों का बजट बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर ई-कॉमर्स और रिटेल सेल्स पर दिख रहा है।
फेस्टिव सीजन की शुरुआत काफी धीमी रही है। शुरुआती चार दिनों की ई-कॉमर्स सेल्स का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) ₹29,800 करोड़ से ₹30,900 करोड़ के बीच रहा है, जो पिछले साल के ₹33,200 करोड़ के मुकाबले काफी कम है। इससे साफ है कि खरीदार अब खर्च करने में काफी सावधानी बरत रहे हैं।
डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग पर असर
सबसे ज्यादा मार कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर पड़ी है। स्मार्टफोन और होम अप्लायंसेज की कीमतों में 40% तक की बढ़ोतरी हुई है। 'Counterpoint Research' के आंकड़ों के मुताबिक, फेस्टिवल विंडो की शुरुआत में स्मार्टफोन की बिक्री में 16% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, रिटेलर्स द्वारा दिए जाने वाले डिस्काउंट भी पिछले साल की तुलना में 35% से 40% कम हैं, जिससे बजट के प्रति जागरूक ग्राहक खरीदारी से बच रहे हैं।
महंगाई और हवाई सफर का बोझ
खाद्य वस्तुओं की महंगाई का असर आम आदमी की जेब पर साफ दिख रहा है। सितंबर में खुदरा खाद्य कीमतों में 7.74% की बढ़ोतरी हुई है। चीनी की कीमतों में तो साल-दर-साल 30% तक की तेजी आई है। इसका असर FMCG कंपनियों पर भी पड़ रहा है, जो लागत कम करने के लिए या तो कीमतें बढ़ा रही हैं या पैकेज साइज घटा रही हैं। वहीं, हवाई सफर भी महंगा हो गया है; घरेलू एयरफेयर में पिछले साल के मुकाबले 68% का भारी उछाल आया है, जिससे परिवारों ने यात्रा प्लान्स में कटौती कर दी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि रिटेल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और FMCG कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियों में वॉल्यूम ग्रोथ एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। अगर कंपनियां सेल्स वॉल्यूम नहीं बढ़ा पाती हैं, तो इसका असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ना तय है। निवेशकों को आगामी क्वार्टरली रिपोर्ट्स पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
