Fertilizer Subsidy: सरकारी खजाने पर भारी बोझ, सब्सिडी बिल **₹3 लाख करोड़** के पार होने की आशंका

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Fertilizer Subsidy: सरकारी खजाने पर भारी बोझ, सब्सिडी बिल **₹3 लाख करोड़** के पार होने की आशंका

ग्लोबल मार्केट में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते भारत का फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल इस फाइनेंशियल ईयर में **₹3 लाख करोड़** को पार करने की राह पर है।

खजाने पर बढ़ रहा दबाव

सरकार के फर्टिलाइजर सब्सिडी खर्च में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल स्तर पर कच्चे माल की कीमतों में आई जोरदार तेजी है। इसके चलते खाद बनाने की लागत और किसानों को बेचे जाने वाले दाम के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है।

सब्सिडी का गणित और कंपनियों पर असर

सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रति बैग सब्सिडी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। यूरिया पर सब्सिडी 106% बढ़कर ₹2,775 प्रति बैग हो गई है, जबकि DAP (Di-Ammonium Phosphate) पर सब्सिडी 61% उछलकर ₹3,523 प्रति बैग तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार सब्सिडी दे रही है, लेकिन कच्चे माल की अस्थिर कीमतों और सब्सिडी मिलने में देरी से फर्टिलाइजर कंपनियों के ऑपरेशनल मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।

ग्लोबल संकट और मैन्युफैक्चरिंग में चुनौती

सल्फर की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। यूरिया के लिए 80% से ज्यादा रॉ मटेरियल के तौर पर इस्तेमाल होने वाली LNG की कीमतों में आग लगी है। स्पॉट LNG की कीमतें $29 प्रति MMBtu तक पहुंच गई हैं, जबकि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में 65% तक की कटौती देखी गई है। इस कारण कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 26% गिर गया है।

रबी सीजन की तैयारी

सरकार रबी सीजन के लिए स्टॉक बनाए रखने पर जोर दे रही है। सितंबर के अंत तक देश में 145.46 लाख टन फर्टिलाइजर का स्टॉक मौजूद था। रबी सीजन के लिए कुल मांग 380.96 लाख टन आंकी गई है। भविष्य में सरकार अब नेचुरल और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है ताकि इम्पोर्ट पर निर्भरता कम हो सके। निवेशकों के लिए अगले कुछ क्वार्टर बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे, जिसमें सब्सिडी भुगतान की गति और कच्चे माल के ट्रेंड पर नजर रखना जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.