केंद्र सरकार अपनी आगामी FY28 Budget रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। अब सरकार व्यापक रूप से सीमा शुल्क (Customs duty) घटाने के बजाय डिजिटल ट्रेड को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। Bharat Trade Net जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रांजेक्शन लागत को कम करने की तैयारी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में सरकार का फोकस अब ऑपरेशनल स्पीड और डिजिटल एफिशिएंसी बढ़ाने पर है ताकि भारतीय कंपनियों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' आसान हो सके। सरकार का मानना है कि मौजूदा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के चलते कई टैरिफ बाधाएं पहले ही कम हो चुकी हैं, इसलिए अब ध्यान टैक्स दरों के बजाय माल की आवाजाही को गति देने पर है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या है बदलाव?
इस योजना का मुख्य हिस्सा 'Bharat Trade Net' को पूरी तरह से चालू करना है। यह एक सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म होगा जो व्यापार से जुड़े डॉक्यूमेंटेशन को आसान बनाएगा। इसे मौजूदा 'Single Window Interface for Facilitating Trade' के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे बंदरगाहों पर कार्गो के रुकने का समय (Dwell time) तेजी से कम होगा। लॉजिस्टिक्स और इम्पोर्ट पर निर्भर रहने वाली कंपनियों के लिए यह बदलाव वर्किंग कैपिटल एफिशिएंसी बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर 118 विशिष्ट उत्पादों पर सीमा शुल्क में रियायतों की समीक्षा है। 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर'—जहां कच्चे माल पर टैक्स फिनिश्ड गुड्स से ज्यादा होता है—को खत्म करने के लिए सरकार काम कर रही है। लंबी अवधि में सरकार 'सिंगल-डिजिट कस्टम्स टैरिफ' का लक्ष्य लेकर चल रही है।
अगले कुछ महीनों में, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स और इंडस्ट्रियल मशीनरी सेक्टर के निवेशकों को उन विशिष्ट घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए, जिनका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। मध्य नवंबर 2026 तक बजट से जुड़ी परामर्श प्रक्रिया जारी रहेगी, जो भविष्य की दिशा तय करेगी।
