भारत का एक्सपोर्ट (Export) हुआ 'ईस्ट' की ओर शिफ्ट! ASEAN देशों में शिपमेंट **62%** उछला

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का एक्सपोर्ट (Export) हुआ 'ईस्ट' की ओर शिफ्ट! ASEAN देशों में शिपमेंट **62%** उछला

भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फिस्कल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Export) **15.9%** बढ़कर **$129.32 बिलियन** तक पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में खासकर ASEAN और नॉर्थ ईस्ट एशिया (NEA) मार्केट्स से आई जबरदस्त मांग का बड़ा योगदान रहा।

एक्सपोर्ट में आया बड़ा ज्योग्राफिकल बदलाव

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में, भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Exports) में 15.9% का सालाना ग्रोथ देखने को मिला, जो $129.32 बिलियन पर पहुंच गया। ये बढ़ोतरी ग्लोबली हर जगह एक जैसी नहीं रही, बल्कि एशिया और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर झुकाव दिखाती है। इससे साफ है कि भारत अब पश्चिमी देशों पर अपनी एक्सपोर्ट निर्भरता कम कर रहा है।

ASEAN और नॉर्थ ईस्ट एशिया बने ग्रोथ के इंजन

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में सबसे बड़ा ट्रेंड एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (ASEAN) और नॉर्थ ईस्ट एशिया (NEA) से आई भारी मांग रही। ASEAN देशों को एक्सपोर्ट में करीब 62% का उछाल आया और यह $14.61 बिलियन तक पहुंच गया। सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों से हुई बढ़ी हुई शिपमेंट्स ने इस ग्रोथ को सहारा दिया। वहीं, नॉर्थ ईस्ट एशिया में भी एक्सपोर्ट में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई, क्योंकि भारतीय प्रोड्यूसर्स ने नए डिमांड चैनल तलाशे हैं।

यह ट्रेंड पारंपरिक व्यापारिक साझेदारों से बिल्कुल अलग है। NAFTA देशों को एक्सपोर्ट, जो ऐतिहासिक रूप से भारत का सबसे बड़ा मार्केट रहा है, वहीं ग्रोथ सिर्फ 2% रही और यह $28.41 बिलियन रहा। इसी तरह, यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट में भी मामूली 6% की बढ़ोतरी हुई, जो $25.05 बिलियन रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि जहां पश्चिम में मांग कमजोर बनी हुई है, वहीं भारतीय एक्सपोर्टर्स एशिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहे हैं।

ट्रेड डेफिसिट और आर्थिक जोखिम

एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड बैलेंस के लिए अच्छी खबर है, लेकिन मैक्रो इकोनॉमिक पिक्चर थोड़ी पेचीदा है। मजबूत एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस के बावजूद, जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) छह महीने के हाई पर $31.98 बिलियन पर पहुंच गया। यह डेफिसिट कच्चे तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स जैसे सेक्टर्स में हाई इम्पोर्ट बिल की वजह से बढ़ा है।

निवेशकों के लिए, बढ़ता ट्रेड डेफिसिट एक अहम इंडिकेटर है। ज्यादा डेफिसिट भारतीय रुपए और देश के करंट अकाउंट बैलेंस पर दबाव डालता है। हालांकि, एशियाई बाजारों में विविधीकरण (Diversification) से ग्लोबल ट्रेड रूट में रुकावटों और बढ़ती शिपिंग लागत के जोखिम कम होते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था अभी भी ग्लोबल अनिश्चितता और अस्थिर मांग पैटर्न के प्रति संवेदनशील है।

रणनीति और भविष्य का अनुमान

नए मार्केट्स में जाने की यह कोशिश फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के बढ़ते इस्तेमाल से भी जुड़ी है। ऑफिशियल आंकड़े बताते हैं कि 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' (Certificate of Origin) जारी होने में बढ़ोतरी हुई है, जो दिखाता है कि कंपनियां कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए ट्रेड पैक्ट्स का फायदा उठा रही हैं। हालांकि, तेजी से एक्सपोर्ट ग्रोथ पर निर्भरता, इन FTAs के नेटवर्क के कारण घरेलू सेक्टर्स में इम्पोर्ट कॉम्पिटिशन के जोखिमों का सामना कर सकती है।

आगे चलकर, मार्केट पार्टिसिपेंट्स यह देखेंगे कि बदलते ग्लोबल सप्लाई चेन के बीच ASEAN और NEA मार्केट्स की यह मोमेंटम कितनी कायम रह पाती है। आने वाले महीनों में ट्रेड डेफिसिट का ट्रेंड और करेंसी में उतार-चढ़ाव व इम्पोर्ट लागतें एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड भारतीय फर्मों के मुनाफे को कैसे प्रभावित करती हैं, इस पर नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.