Indian Economy: सितंबर में इकोनॉमी की जोरदार वापसी, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर का दबदबा

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Economy: सितंबर में इकोनॉमी की जोरदार वापसी, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर का दबदबा

सितंबर 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार रफ्तार पकड़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उछाल और ऑटो सेल्स के दम पर इंडस्ट्रियल ग्रोथ ने जोर पकड़ा है, हालांकि लेबर मार्केट और क्रेडिट कार्ड खर्च के आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं।

सितंबर 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त के 52.8 से बढ़कर 55.1 पर पहुंच गया है, जो पिछले 7 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह आंकड़ा बताता है कि फैक्ट्रियां घरेलू और निर्यात ऑर्डर्स के दम पर बेहतर तरीके से काम कर रही हैं। मनीकंट्रोल एडवांस बिजनेस इंडेक्स भी 102.8 पर पहुंच गया है।

मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो ने भरी उड़ान

इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में व्यापक सुधार दिखा है, जहां कोयला उत्पादन में 9.2% की वृद्धि हुई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर इस तेजी का मुख्य केंद्र रहा, जहां पैसेंजर गाड़ियों की रिटेल सेल्स में डबल डिजिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई। Maruti Suzuki, Mahindra और Tata Motors जैसी कंपनियों को त्योहारों की मांग का सीधा फायदा मिला। इसके अलावा, ट्रैक्टर की बिक्री में 14.4% की तेजी ग्रामीण मांग के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

जॉब मार्केट और खर्च में मिले-जुले संकेत

मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर स्थिति असमान है। Naukri JobSpeak इंडेक्स के अनुसार, हायरिंग में पिछले साल के मुकाबले केवल 2% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, AI/ML सेक्टर में हायरिंग मांग 20% बढ़ी है, लेकिन IT और एजुकेशन जैसे सेक्टरों में सुस्ती दिख रही है।

उपभोक्ता खर्च के मोर्चे पर भी सावधानी बरती जा रही है। डिजिटल पेमेंट का चलन तो जारी है, लेकिन क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च में 3.1% की गिरावट आई है। यह संकेत है कि ग्राहक अब उधारी पर खर्च करने को लेकर सतर्क हो रहे हैं। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या यह मैन्युफैक्चरिंग की तेजी आगे भी बरकरार रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.