मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया है कि ग्लोबल अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2027 तक फिसकल डेफिसिट को **4.3%** तक लाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। कच्चे तेल और उर्वरक की बढ़ती कीमतें देश की राजकोषीय सेहत के लिए सबसे बड़ा रिस्क बनी हुई हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मौजूदा स्थिति संतुलित नजर आ रही है। वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, घरेलू मोर्चे पर मजबूती तो दिख रही है, लेकिन बाहरी कारक राजकोषीय रास्ते में बाधा बन सकते हैं। उन्होंने साफ किया है कि FY27 तक फिसकल डेफिसिट को 4.3% तक सीमित रखना कोई आसान काम नहीं है, बल्कि यह एक कठिन लक्ष्य है जिसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होगी।
फिसकल सेहत के लिए खतरा क्यों?
मुख्य रूप से भारत की कच्चे तेल (Crude Oil) और फर्टिलाइजर की कीमतों पर निर्भरता सरकारी खजाने पर दबाव डाल रही है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान फिसकल डेफिसिट बजट अनुमानों के 9.6% तक पहुंच गया है, जो बताता है कि सरकार के पास गलती की गुंजाइश बहुत कम है। अगर ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण ये कीमतें बढ़ती हैं, तो सब्सिडी का बोझ और बढ़ेगा।
मैक्रोइकॉनॉमिक रिस्क और बाजार
निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बात यह है कि क्या ऊर्जा की बढ़ती लागत महंगाई में तब्दील हो रही है? यदि ग्लोबल कमोडिटी कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) की ग्रोथ धीमी होती है, तो सरकार का फिसकल स्लिपेज का रिस्क बढ़ सकता है।
नई रणनीति: प्राइवेट सेक्टर की भूमिका
CEA ने भविष्य के लिए एक नई रूपरेखा पेश की है। उन्होंने जोर दिया है कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मामले में ऐसे मॉडल्स पर काम करना चाहिए जो मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुकूल हों, न कि सिर्फ कैपिटल-इंटेंसिव। साथ ही, अब लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए सिर्फ सरकारी खर्च काफी नहीं होगा; प्राइवेट सेक्टर को रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और वर्कफोर्स ट्रेनिंग में खुद आगे आकर निवेश बढ़ाना होगा।
