भारत की GDP ग्रोथ पहली तिमाही में **7.8%** रही है, लेकिन बढ़ती महंगाई और मैन्युफैक्चरिंग PMI का **52.8** पर आना सुस्ती के संकेत दे रहा है। अब सबकी नजर RBI की पॉलिसी मीटिंग पर है।
देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मिली-जुली खबरें सामने आ रही हैं। चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जिसका मुख्य श्रेय सर्विसेज सेक्टर और कैपिटल इन्वेस्टमेंट को जाता है। हालांकि, हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स अब सुस्ती की ओर इशारा कर रहे हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव
अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग PMI गिरकर 52.8 पर आ गया है। हालांकि यह अभी भी विस्तार के दायरे में है, लेकिन पिछली तेजी के मुकाबले इसमें गिरावट फैक्ट्री आउटपुट में नरमी को दर्शाती है। सीमेंट और पावर जैसे सेक्टर में सीजनल कारणों और घरेलू मांग में कमी के चलते दबाव साफ दिख रहा है।
महंगाई और RBI का रुख
अगस्त में कंज्यूमर इन्फ्लेशन 4.8% के स्तर पर पहुंच गया है। फूड और ट्रांसपोर्ट की बढ़ती कीमतों का असर अब हाउसहोल्ड बजट पर पड़ रहा है, जिससे रिटेल सेक्टर पर दबाव बन सकता है। 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर निवेशकों की निगाहें टिकी हैं। बाजार यह देख रहा है कि क्या RBI ग्रोथ को सपोर्ट देने और महंगाई को थामने के बीच संतुलन बनाने के लिए ब्याज दरों पर कोई बड़ा फैसला लेता है।
मजबूत विदेशी भंडार का सहारा
इन चुनौतियों के बीच राहत की बात यह है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) $741 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है। जुलाई में $10.7 बिलियन का विदेशी निवेश भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाता है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन सहित कई दिग्गजों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है, लेकिन अब आने वाले क्वार्टरली नतीजों और कंजम्पशन पैटर्न पर नजर रखना जरूरी होगा।
